गुर्जर-जाटों में मायूसी, मंत्री बनने की उम्मीद टूटी
पश्चिमी यूपी की राजनीति में जाट और गुर्जर मतदाता की खासी भूमिका रहती है। पिछले 10 महीने से चल रहे किसान आंदोलन में वेस्ट यूपी की भागीदारी रही है। पांच सितंबर को मुजफ्फरनगर में हुई किसान महापंचायत और 19 सितंबर को छपरौली में जयंत चौधरी द्वारा रखी गई श्रद्घांजलि सभा में जुटी भीड़ किसानों में भाजपा के प्रति नाराजगी से भी जोड़ी जा रही है। कई जिलों में भाजपा सांसदों-विधायकों को विरोध का सामना भी करना पड़ रहा है। ऐसे में माना जा रहा था कि वेस्ट यूपी की किसान जातियों को साधने के लिए किसी जाट या गुर्जर को मंत्री बनाया जा सकता है। जाट विधायकों में छपरौली से सहेंद्र रमाला और मोदीनगर से मंजू सिवाच का नाम चर्चा में आया था, इसी तरह से गुर्जर विधायकों में मेरठ से सोमेंद्र तोमर और दादरी के तेजपाल सिंह नागर का नाम चर्चाओं में आया था। इसके अलावा अन्य जाट व गुर्जर विधायक भी मंत्री पद पाने के लिए लामबंदी में जुटे हुए थे, इन सभी की उम्मीदों को झटका लगा है।
मंत्री बनने पर आवास पर मनाई खुशियां
गंगानगर के राजेंद्रपुरम में दिनेश खटीक के राज्यमंत्री बनने के बाद शुभकामनाएं देने वालों का तांता लगा रहा। खटीक की माता सरोज देवी, पत्नी आरती, बच्चे प्रांजल और एंजिल ने मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया। पिता देवेंद्र खटीक ने कहा कि उनका परिवार तीन पीढ़ियों से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ा हुआ है। देवेंद खटीक के दादा सगवा सिंह और उनके पिता बनवारी लाल भी संघ से जुड़े रहे। पिता ने बताया कि दिनेश राजनीति में हमेशा लगे रहते हैं।
दिनेश के भाई नितिन खटीक जिला पंचायत सदस्य रहे हैं। तीन बहनें हैं। एक बहन कोमल उर्फ आर्या भी राजनीति से जुड़ी हुई हैं। वे हापुड़ में जिला पंचायत सदस्य हैं। दूसरी बहन नीलू उर्फ वर्षा सरसावा में चेयरमैन हैं। तीसरी बहन सुधा हैं। वहीं उत्तर प्रदेश श्रम कल्याण परिषद के अध्यक्ष पंडित सुनील भराला ने दिनेश खटीक को मंत्री बनने पर बधाई दी।
द्रोपदी घाट का जीर्णोद्धार कराया
पिछले 5 सालों में विधायक रहते हुए दिनेश खटीक ने क्षेत्र में काफी विकास कार्य कराए हैं। ऐतिहासिक महत्व के द्रोपदी घाट का पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण कराया। पांडवेश्वर मंदिर के पास विकास कार्य समेत क्षेत्र के लिए कई कार्य कराए। खादर क्षेत्र को बाढ़ से सुरक्षित बचाने के लिए 18 करोड़ रुपये की दो परियोजनाओं को विधायक दिनेश खटीक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर प्रस्तावित कराया। हस्तिनापुर में राजकीय बालिका डिग्री कॉलेज का निर्माण, मालीपुर में गौआश्रय स्थल बनवाया।
डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई की फिर अनदेखी
मेरठ। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई की मीडिया की चर्चाओं में आने के बाद एक बार फिर अनदेखी हुई है। उन्हें पार्टी नेतृत्व ने न तो विधान परिषद सदस्य नामित किया और न ही मंत्री पद से नवाजा। सन 2014 में लोकसभा चुनाव और नरेंद्र मोदी की ताजपोशी के समय प्रदेश की कमान डॉ. लक्ष्मीकांत के हाथ में ही थी। 2017 में उन्हें शहर सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। कभी विधान परिषद, कभी राज्यसभा तो कभी राज्यपाल बनाए जाने की चर्चाएं चलती रहती हैं। एक बार फिर एमएलसी के चार स्थान भरे जाने और मंत्रिमंडल की संभावना के बीच उनका नाम चर्चा में आया, लेकिन फिर मायूसी मिली।
जनपद के लिए गौरव का क्षण
महाभारत कालीन इतिहास की धरोहर को अपने में समेटे हुए हस्तिनापुर के विधायक दिनेश खटीक को प्रदेश सरकार में मंत्री पद प्राप्त होना जनपद के लिए गौरव का क्षण है। मैं उन्हें बधाई देने के साथ ही प्रांतीय नेतृत्व को धन्यवाद देता हूं। - राजेंद्र अग्रवाल, सांसद
जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़
हस्तिनापुर विधायक दिनेश खटीक पर कई मामले दर्ज हैं। कुछ दिन पहले एक अधिवक्ता ने आत्महत्या की थी, जिसका आरोप हस्तिनापुर विधायक पर था। उन्हें मंत्री बनाना जनता के भरोसे के साथ खिलवाड़ है। - राजपाल सिंह, जिला अध्यक्ष, सपा