सुनिश्चित किया जाता है कि सभी परिवार के सदस्य एक-दूसरे के हर पहलू को यहां साझा कर सकें। सत्यप्रभा वशिष्ठ ने बताया कि उनका परिवार लंबे समय से संयुक्त रूप से रह रहा है। संयुक्त परिवार का फायदा सबसे अधिक है। किसी तरह की कोई चिंता नहीं होती है। दिनभर आपके आसपास आपके अपने रहते हैं।
परिवार के सदस्यों से ज्यादा कौन किसकी मदद कर सकता है। सभी एक साथ रहते हैं। सभी एक-दूसरे की मदद करने के लिए आगे आते हैं। बच्चों को भी बाहरी दोस्तों की जरूरत नहीं होती है। एक साथ मिलकर पूरी टीम बना लेते हैं। खेल का रंग जमता है। बच्चे भी खुश रहते हैं। एकल परिवार में यह खुशियां कहां से मिलेंगी। संयुक्त परिवार का अपना महत्व है। इसे कायम रखना हम सभी की जिम्मेदारी हैं।
संयुक्त परिवार
पेलखा निवासी 78 वर्षीय प्रीतम सिंह बताते हैं कि संयुक्त परिवारों का सुख भी अलग ही था। भारतीय संस्कृति और सभ्यता कितने ही परिवर्तनों के दौर से गुजर रही है। महत्वकांक्षा और भागदौड़ भरी जिंदगी में अब परिवारों का विघटन दुख देता है।
संयुक्त परिवार आज भी जीवन का आधार बने हुए हैं। सामाजिक, मनोरंजनात्मक, आर्थिक, सांस्कृतिक आदि दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करने में ऐसे परिवार को मानसिक तनाव, असुरक्षा, पारिवारिक कलह आदि की भावना छू तक नहीं पाई है।