मेरठ जिले में 26 गोशालाएं संचालित हैं। सभी गोशालाओं में 4862 गोवंश हैं। इनमें लगभग 3062 गायें और इनके बच्चे हैं। 1800 बैल हैं। सरकार गाय, बैल और इनके मलमूत्र को उपयोग में लाकर गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कदम उठा रही है। इसके तहत प्रशासन ने नीति आयोग की इस योजना के तहत एमआईईटी अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर के सहयोग से मेरठ के रोहटा ब्लॉक की गोशाला में बैल के बल से चलने वाला ऊर्जा उत्पादन सयंत्र लगाने का निर्णय लिया है।
गोशाला में बिजली बनाता बैल।
- फोटो : अमर उजाला
गोशाला में बनती बिजली।
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जितनी तेज चलेगा बैल, उतनी अधिक बनेगी बिजली
बैल के बल से चलने वाला बिजली उत्पादन सयंत्र बैल की क्षमता के अनुसार ही बिजली उत्पादन करेगा। बैल जितनी तेज चलेगा, बिजली भी उतनी अधिक बनेगी। संयत्र में बिजली बनाने के लिए ऑल्टीनेटर लगा है। इस ऑल्टीनेटर को चलाने के लिए लकड़ी की बल्ली या लंबा पाइप लगा है। जिसको एक बैल खींचता है और बिजली उत्पादन सयंत्र के चारों तरफ चक्कर लगाता है। जितनी तेज बैल चलेगा उतनी ही अधिक बिजली बनेगी।
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बागपत में चल रहा यह प्रोजेक्ट सफल है। मेरठ में रोहटा ब्लॉक में पहला सयंत्र पायलट प्रोजेक्ट में रूप में लगाया जाएगा। दीपावली के बाद बैल के बल से चलने वाले बिजली उत्पादन सयंत्र को लगाया जाएगा। सफल होने पर अन्य गोशालाओं में भी उपयोग किया जाएगा।
- डॉ. अखिलेश गर्ग, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी