बीज को स्टेप्टोसाइक्लिन का आठ लीटर पानी में घोल बनाकर 30 मिनट तक पानी में डूबाकर उपचारित करें। इसकी रोपाई में कतार से कतार एवं पौधे से पौधे की दूरी 45 से 45 सेमी और पछेती किस्मों के लिए कतार से कतार एवं पौधे से पौधे की दूरी 60 से 45 सेमी रखनी चाहिए।
फूल गोभी की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए बलुई दोमट भूमि उत्तम होती है, जिसमें जीवांश की प्रचुर मात्रा उपलब्ध हो। रोपाई से पूर्व खेत की जुताई कर समतल कर देना चाहिए। उपरोक्त खेती के लिए 200-250 क्विंटल सड़ी हुई गोबर खाद रोपाई के लगभग एक माह पूर्व अच्छी तरह मिला देना चाहिए।
इसके अतिरिक्त नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश की क्रमश: 120, 60 एवं 40 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से देना चाहिए। नाइट्रोजन की एक तिहाई एवं फास्फोरस, पोटाश की पूरी मात्रा अंतिम जुताई से पहले खेत में मिला देना चाहिए। शेष नाइट्रोजन की आधी मात्रा दो बराबर भागों में 30 और 45 दिन बाद देनी चाहिए। इसके अतिरिक्त सूक्ष्म तत्वों बोरोन 10 से 15 किग्रा प्रति हेक्टेयर एवं मॉलीब्डेनम की मात्रा एवं 1 से 1.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर दर से मिट्टी में मिला देना चाहिए।
उन्नत किस्में
अगेती किस्में- अर्ली, कुंआरी, पूसा कातिकी, पूसा दीपाली, समर किंग
मध्यम किस्में- पंत सुभ्रा, पूसा सुभ्रा, पूसा सिन्थेटिक, पूसा अगहनी, पूसा स्नोबाल
पछेती- पूसा स्नोबाल-1, पूसा स्नोबाल-2, पूसा स्नोबाल-16
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