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यूपी: करोड़ों की जमीन का खेल, अमर उजाला ने किया खुलासा, अधिकारियों में मचा हड़कंप

Sat, 24 Oct 2020 11:01 AM IST
कपिल kapil अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ

सार

  • खुलासे से हड़कंप, अधिकारियों में खलबली
  • हस्तिनापुर पांडवान की सौ बीघा जमीन सरकार में निहित 
  • मवाना तहसील में चल रहा फर्जी वसीयत से लेकर दाखिल खारिज का खेल
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जमीन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ में मवाना तहसील के रजिस्ट्रार कानूनगो बिजेंद्र के खिलाफ शुक्रवार को अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद तहसील में हड़कंप मच गया। कानूनगो के तमाम काले कारनामों की फाइलें टटोली जाने लगीं। इसी बीच तहसीलदार ने सबसे पहले हस्तिनापुर पांडवान की करीब सौ बीघा जमीन, जिस पर शांति देवी की फर्जी वसीयत का केस चल रहा था उस पर कार्रवाई तय की। 

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इस मामले में एसडीएम मवाना द्वारा नोटिस जारी कर 26 अक्तूबर को सुनवाई के लिए बुलाया गया था। लेकिन तहसीलदार ने शुक्रवार को ही उक्त जमीन सरकार में निहित करने का आदेश जारी कर दिया। 

भू-माफिया को संरक्षण देने में तहसील मवाना के कर्मचारी और अधिकारियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। जमीनों की दाखिल खारिज में जमकर खेल किया गया। तमाम मामलों की शिकायत पीड़ितों के साथ बार एसोसिएशन ने भी की। लेकिन किसी भी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पिछले डेढ़ दशक से जमे रजिस्ट्रार कानूनगो ने जैसा चाहा वैसा किया। तहसीलदार और एसडीएम तक सभी उसके इशारे पर काम करते रहे।  
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एक के बाद एक परतें खुलने के बाद कई गंभीर मामले सामने आ रहे हैं। इनमें से एक में हस्तिनापुर निवासी शांति देवी पत्नी स्वर्गीय बाबूराम की मृत्यु के बाद न केवल फर्जी तरीके से वसीयत तैयार की गई, बल्कि उस वसीयत को तैयार करते वक्त एक अन्य महिला का फोटो चस्पा कर दिया गया। शांति देवी के पति स्वतंत्रता सेनानी थे, जिस कारण उन्हें हस्तिनापुर पांडवान में सरकार की तरफ से कृषि भूमि दी गई थी। लेकिन शांति देवी की मृत्यु के बाद फर्जी वसीयत कराने वालों के नाम जमीन का दाखिल खारिज कर दिया गया। 

गंभीर बात ये रही कि दाखिल खारिज करते वक्त वसीयत की फोटो कॉपी जमा कराई गई, मूल प्रति को नहीं देखा गया। क्योंकि मूल प्रति से शांति देवी का फोटो स्पष्ट हो जाता। जबकि इस जमीन पर ब्रह्मचंद पुत्र चंद्रभान निवासी कुंडा काबिज था। इस मामले को लेकर तहसीलदार न्यायालय में वाद चल रहा है। लेकिन इसी बीच इस जमीन का दाखिल खारिज ब्रह्मचंद के नाम पर कर दिया गया।

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अब आपस में लड़ रहे केस
एक मामला ऐसा भी सामने आया है जिसमें एक ही जमीन को दो बार दाखिल खारिज कर दिया गया। अब जमीन लेने वाले आपस में उलझ रहे हैं। ग्राम गुढ़ा निवासी शांति देवी पत्नी महावीर ने खसरा संख्या 541, 542, 543, 555/1 और 558 का बैनामा 21 जनवरी 2004 को नरेंद्र कुमार रहेला पुत्र छबीलदास निवासी मोहल्ला कल्याण सिंह मवाना कला को किया था। लेकिन इसके बाद उक्त जमीन गुरमीत सिंह पुत्र लाभ सिंह निवासी बेरीपुरा दिल्ली रोड मेरठ को बेच दी गई। जिसके आधार पर इस जमीन का 29 अप्रैल 2013 को दाखिल खारिज भी कर दिया गया। जब नरेंद्र सिंह ने इस पर आपत्ति जताई तो 01 मई 2013 को जमीन नरेंद्र सिंह के नाम पर कर दी गई। अब दोनों आपस में केस लड़ रहे हैं। 

हटाए बिना सही जांच नहीं
इस मामले में शिकायतकर्ता भाजपा नेता अशोक चौधरी का कहना है कि रजिस्ट्रार कानूनगो लंबे समय से मवाना में तैनात है। पहले बसपा और सपा शासन में सत्ता पक्ष के लोगों के साथ मिलकर खेल किया तो अब भाजपा के कुछ लोग उसे संरक्षण दे रहे हैं। मवाना सिविल बार एसोसिएशन के सचिव जसबीर सिंह भी बिजेंद्र के खिलाफ पत्र लिख चुके हैं। लेकिन आज तक भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि जब तक बिजेंद्र मवाना तहसील में रहेगा, तब तक जांच प्रभावित होगी।

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