इसके बाद से वो पीसीएस की परीक्षा में बैठ रहीं थीं, पिछली परीक्षा में एक नंबर से रह गई। एक बार इंटरव्यू में भी पास नहीं हो पाईं। लेकिन उनके हौसलों के आगे मुश्किलों ने हार मान ली और उन्होंने संघर्ष के बावजूद पीसीएस की परीक्षा पास कर ली। उन्होंने लोक प्रशासन विषय से परीक्षा पास की है, उन्हें जिला दिव्यांगजन कल्याण सशक्तिकरण अधिकारी का पद मिला है।
बेटियों को उड़ने दो, आगे बढ़ने दो
शिखा शर्मा ने बताया कि मम्मी पुष्पा शर्मा और पापा शंकरदत्त शर्मा व परिवार के लोगों ने कभी हौसला टूटने नहीं दिया। परीक्षा परिणाम से निराशा मिली तो मैंने पढ़ाई छोड़ने तक का मन बनाया, लेकिन परिवार के लोगों ने मुझे पढ़ाई न छोड़ने का हौसला दिया। जिससे मुझे आगे बढ़ने की हिम्मत मिली। सभी को यही कहूंगी कि बेटियों को उड़ने दो और आगे बढ़ने दो, वो अपनी मंजिल खुद ढूंढ लेंगी।
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पिता शंकरदत्त शर्मा ने कहा कि उनकी बेटी होनहार है और हमने बेटे से बढ़कर उसका साथ दिया। सभी को बेटियों पर भरोसा कर उसे आगे बढ़ने देंगे तो परिणाम ऐसे ही आएंगे। परीक्षा पास होने पर ताई चंद्रा शर्मा, बहन प्रीति शर्मा, जीजा अतुल शर्मा, भाई उदित शर्मा, मौसी व चाची साधना शर्मा सहित अन्य लोगों ने खुशी जताई।