शिकायतों पर नहीं होती सुनवाई
नकली किताबें, पब्लिशर के नाम का दुरुपयोग कर फर्जी किताबें छापने का धंधा खुलेआम हो रहा है। शिकायत हो तो एक्शन नहीं होता। मेरठ प्रकाशक कल्याण संघ के अध्यक्ष मनोज बाटला कहते हैं कि किताब प्रिंटिंग कारोबार में नकली माल करने वालों का राज है। पुलिस को शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं होती।
जिला उद्योग केंद्र देता है अनुमति
प्रिंटिंग कारोबारी बताते हैं कि प्रिंटिंग इकाई के लिए जिला उद्योग केंद्र से अनुमति लेनी होती है। प्रकाशन के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं। लेकिन प्रिंटिंग मशीनें लगाकर छपाई का काम एमएसएमई में आता है इसलिए अनुमति जरूरी है। इकाई संचालन के अनुमति से इतर उद्योग विभाग निगरानी नहीं करता कि क्या छापा जा रहा है। एनसीईआरटी स्वयं निगरानी रखता है कि नकली किताबें तो नहीं छप रहीं हैं एनसीईआरटी ही शिकायत कराता है।
एनसीईआरटी देता है 17 फीसदी छूट
एनसीईआरटी 17 प्रतिशत छूट के साथ हर शहर में अपने वितरक को पुस्तकें उपलब्ध कराती है। इसके बाद यह शहर की छोटी-छोटी दुकानों पर 15 प्रतिशत मुनाफे के साथ पहुंच जाती हैं। नियमानुसार एक पुस्तक को बेचने पर विक्रेता को 15 प्रतिशत का मुनाफा मिलता है। किताबों को एडवांस पेमेंट पर खरीदा जाता है।
इसके विपरीत फर्जी पुस्तक छापने वाले प्रकाशक पुस्तक विक्रेताओं को 40 प्रतिशत तक कमीशन और एक साल का उधार देते हैं। पब्लिशर एसोसिएशन के अध्यक्ष आशु रस्तोगी ने बताया कि इसमें इमानदारी से काम करने वाले रिटेलर पूरी तरफ खत्म हो जाते हैं। इस तरह के कार्यों पर अंकुश लगाया जाना अब आवश्यक हो गया है।