मेरठ से ग्राउंड रिपोर्ट: भीषण गर्मी में बचपन बेहाल, बेसिक स्कूलों में बिन पंखे पढ़ रहे नौनिहाल
राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Thu, 09 May 2024 04:04 PM IST
सार
40 डिग्री तापमान की भीषण गर्मी में जहां अधिकारी एसी में बैठे रहते हैं तो शहर के कुछ बेसिक स्कूलों में बच्चे बिना पंखे ही पढ़ने को मजबूर हैं। यहां न पंखे की व्यवस्था है न ठीक से फर्नीचर की। कई स्कूलों में अमर उजाला ने पड़ताल की तो बच्चों के हाल बेहाल नजर आए।
गर्मी में पढ़ते बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
मेरठ शहर में करीब 40 डिग्री तापमान की भीषण गर्मी में कुछ बेसिक स्कूलों के बच्चे बिना पंखे ही पढ़ने को मजबूर हैं। बिजली का बिल भी शिक्षक अपनी जेब से जमा करा रहे हैं। इतनी गर्मी में पढ़ना तो दूर उनका कई घंटे तक बैठे रहना किसी सजा से कम नहीं है।
स्मार्ट सिटी के ये बच्चे टाट-पट्टी पर पढ़ रहे हैं। बेहतर फर्नीचर तक नहीं है। हाल ये है कि ज्यादा गर्मी होने पर अधिकतर बच्चे समय से पहले ही घर चले जाते हैं। गर्मी से बच्चे ही नहीं, शिक्षक तक बीमार हो रहे हैं। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने शहर के कुछ स्कूलों की पड़ताल की तो यह चौंकाने वाले हालात सामने आए।
गर्मी में पढ़ते बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
मेरठ शहर में करीब 40 डिग्री तापमान की भीषण गर्मी में कुछ बेसिक स्कूलों के बच्चे बिना पंखे ही पढ़ने को मजबूर हैं। बिजली का बिल भी शिक्षक अपनी जेब से जमा करा रहे हैं। इतनी गर्मी में पढ़ना तो दूर उनका कई घंटे तक बैठे रहना किसी सजा से कम नहीं है।
स्मार्ट सिटी के ये बच्चे टाट-पट्टी पर पढ़ रहे हैं। बेहतर फर्नीचर तक नहीं है। हाल ये है कि ज्यादा गर्मी होने पर अधिकतर बच्चे समय से पहले ही घर चले जाते हैं। गर्मी से बच्चे ही नहीं, शिक्षक तक बीमार हो रहे हैं। बुधवार को अमर उजाला की टीम ने शहर के कुछ स्कूलों की पड़ताल की तो यह चौंकाने वाले हालात सामने आए।
केस 1
फैज-ए-आम डिग्री कॉलेज के कैंपस में प्राथमिक विद्यालय कोठी अतानस चलता है। यहां न तो बच्चों के बैठने के लिए उचित स्थान है और न ही फर्नीचर और न ही पंखे की हवा। पीने के पानी और स्वच्छ शौचालय की बेहतर व्यवस्था नहीं है। स्कूल एक कमरे में चलता है। यहां 70 बच्चे टाट पर बैठकर पढ़ते हैं। गर्मी से कुछ बच्चे और शिक्षिका भी बीमारी की चपेट में हैं। यहां गर्मी में कई बच्चे समय से पहले ही घर चले गए। शिक्षामित्र हिना सबा, सिना खान व शाहना ने बताया कि समस्याओं से अधिकारियों को अवगत कराया गया है।
केस 2
पूर्वा अहिरान कंपोजिट विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक 85 बच्चे पढ़ते हैं। यहां शिक्षकों ने बताया कि बिल जमा न होने के कारण स्कूल की आए दिन बिजली कट जाती है। अभी चुनाव के कारण बिजली चालू है। कब कनेक्शन कट जाए, कुछ नहीं पता। स्कूल के प्रधानाध्यापक सुधीर कुमार ने बताया कि शिक्षा मित्र समेत तीन शिक्षक हैं। शिक्षकों की इस स्कूल में ही नहीं, पूरे शहर में कमी है। कक्षा एक और दो के बच्चों के लिए किताबें नहीं आई हैं।
केस 3
थापरनगर स्थित स्वामी विवेकानंद शिशु विहार स्कूल में 38 बच्चे हैं। यहां एक प्रधानाचार्य और एक शिक्षामित्र है। प्रधानाचार्य स्वयं अपने जेब खर्च से स्कूल का बिजली बिल जमा करते हैं। इसलिए यहां के बच्चे पंखे की हवा में फर्नीचर पर बैठकर पढ़ते मिले। स्कूल में शौचालय की सुविधा है। प्रधानाचार्य अनिल शर्मा ने बताया कि वैसे तो एक हजार रुपये हर माह एक कर्मचारी को देकर स्कूल की सफाई कराते हैं, लेकिन वह नहीं आता तो खुद भी झाडू उठा लेते हैं।
केस 4
नगर निगम के सामने पूर्वा फैय्याज अली में किराए के एक कमरे में प्राथमिक विद्यालय चलता है। यहां भी 83 बच्चे टाट पर बैठकर ही पढ़ते हैं। प्रधानाचार्य रजिया परवीन अवकाश पर थीं तो उनसे फोन पर बात की गई। उन्होंने बताया कि स्कूल में फर्नीचर की मांग की गई है।
केस 5
पूर्वा शेखलाल की तंग गलियों में स्थित प्राथमिक स्कूल में 32 बच्चे पढ़ते हैं। प्रधानाध्यापक समेत तीन शिक्षक हैं। पंखों की हवा में बच्चे भी फर्नीचर पर बैठकर पढ़ते मिले। कक्षा एक और दो के बच्चों पर किताबें नहीं हैं। शिक्षिकाएं अपना नाम तक बताने से बचती रहीं।
महानगर में विद्यालयों की स्थिति
प्राथमिक विद्यालय 95
कंपोजिट विद्यालय 30
उच्च प्राथमिक विद्यालय 04
कुल स्थाई शिक्षक 221
कुल शिक्षा मित्र 138
जिन स्कूलों में फर्नीचर, शौचालय, कमरे आदि की दिक्कतें हैं, उनके लिए बजट का प्लान बनाया जा रहा है। जिन स्कूलों में बिजली कनेक्शन नहीं हैं, उनमें शीघ्र कनेक्शन कराकर पंखे लगवाने का काम किया जाएगा।
- प्रदीप कौशिक, खंड शिक्षाधिकारी मुख्यालय