नींद न आने की बीमारी दिमाग पर भारी पड़ रही है। इससे याद्दाश्त कमजोर हो रही है और मानसिक तनाव भी हो रहा है। मानसिक तनाव लंबे समय तक रहे तो अवसाद (डिप्रेशन) का कारण बन रहा है। जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में एक जनवरी 2022 से 31 दिसंबर तक 2022 तक 17750 मरीजों पर किए गए अवलोकन (स्टडी) में खुलासा हुआ है कि इनमें से करीब 40 प्रतिशत अनिंद्रा के शिकार थे। इनमें ऐसे लोग भी थे, जिन्होंने लंबे समय तक स्लीपिंग पिल्स (नींद आने की गोलियां) ली थीं। जिन मरीजों पर स्टडी हुई, उनमें 12600 जिला अस्पताल की ओपीडी में आए, जबकि 5150 मरीज विभाग द्वारा अस्पताल के बाहर आयोजित किए गए 69 कैंपों में आए।
मानसिक रोग विभाग में आए मरीज और उनकी बीमारियां प्रतिशत में
डिप्रेशन 40
माइग्रेन 35
स्कीजोफ्रेनिया 05
अल्जाइमर 05
अत्यधिक गुस्सा 03
मिर्गी 04
हिस्टीरिया 03
नशे की लत 05
छह से आठ घंटे की नींद जरूरी
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. कमलेंद्र किशोर बताते हैं कि जिस समय हम सोते हैं, उस वक्त हमारे कई अंग शरीर के विषाक्त पदार्थों को साफ करते हैं, ताकि सुबह उठने पर हम हल्का महसूस करें। नींद लेना शरीर के अंदरूनी अंगों, मानसिक स्वास्थ्य और त्वचा आदि के लिए बहुत जरूरी है। यही वजह है कि रात में देर तक जागने वालों को बीमारियां घेर लेती हैं। उनका सोने का प्राकृतिक क्लॉक बदल जाता है।
नींद में नई ऊर्जा जुटाता है दिमाग है
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि राणा बताते हैं कि कम सोने का सीधा असर मानसिक स्थिति पर पड़ता है। जितनी देर हम सोते हैं, उतनी देर में हमारा दिमाग भी नई ऊर्जा जुटा लेता है।
तनाव से बनाएं दूरी
मानसिक रोग विभाग द्वारा लगाए गए शिविर में ऐसी भी मरीज आए जो मानसिक रोग को दैवीय प्रकोप समझते हैं। मानसिक रोग दैवीय प्रकोप, भूत-प्रेतए जादू-टोना या टोटका से नहीं होता, यह अन्य रोगों की तरह है। इसका इलाज संभव है।