सत्यापन न होने का उठाते हैं लाभ
दरअसल, जीएसटी पंजीकरण के लिए जो भी आवेदन आते हैं उन्हें कंप्यूटर स्वत: ही कुछ सेंट्रल जीएसटी और कुछ स्टेट जीएसटी को पंजीकरण के लिए आवंटित कर देता है। जो फर्म एसजीएसटी को आवंटित होती हैं, उनका सत्यापन एक महीने के अंदर हो जाता है। सत्यापन के दौरान अगर कोई खामी पाई जाती है तो पंजीकरण निरस्त कर दिया जाता है।
वहीं, जो फर्म सीजीएसटी को आवंटित होती हैं, उसमें से अधिकतर का सत्यापन मानव संसाधन की कमी की वजह से पूरा नहीं हो पाता। ऐसे में फर्जी पतों पर दर्ज फर्में धड़ल्ले से चलती रहती हैं और सरकार को चूना लगाकर मोटा मुनाफा कमा लेती हैं। ऐसी फर्मों को पकड़ने के लिए पिछले दिनों दो माह का विशेष अभियान भी चलाया गया, जिसमें बड़े पैमाने पर फर्जी फर्में पकड़ी गईं, जिनका पंजीकरण निरस्त व निलंबित किया गया।
फर्जी बिल दिखा कर ले लेते हैं आईटीसी
जानकारी के अनुसार, फर्जी पतों पर रजिस्टर की गई फर्में व्यापारियों से मुनाफा लेकर उन्हें बिल जारी कर रही हैं। इसका खुलासा बीते दिनों विभिन्न फर्मों की पड़ताल के दौरान हुआ। एसजीएसटी के सचल दस्ते ने बीते दिनों जांच के दौरान कुछ ऐसे मामले पकड़े, जिनमें जारी किया गया बिल ऐसी फर्मों का था जो न तो संबंधित वस्तु का उत्पादन करती हैं और न ही उसने किसी और से माल खरीदा था। ऐसे में फर्म की ओर से बिल जारी कर फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया जा रहा है। बोगस फर्मों के जरिए टैक्स चोरी के इस तरीके से कई फर्में मोटा मुनाफा कमा कर बंद भी हो गईं।
यह भी पढ़ें: PHOTOS: दरोगा की हालत गंभीर, मैक्स हॉस्पिटल में चार घंटे चला ऑपरेशन, बदमाशों ने सीने में मारी थी गोली