फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जागृति विहार एक्सटेंशन में किसानों ने जोत दी जमीन, अधिकारी रहे गायब

विज्ञापन
विज्ञापन
जागृति विहार एक्सटेंशन: 500 लोगों के घरौंदे के सपनों पर चला ट्रैक्टर
विज्ञापन

मेरठ। मुआवजे का मसला हल न होने से नाराज किसानों ने बुधवार को जागृति विहार एक्सटेंशन में ट्रैक्टर चलाकर जमीन जोत दी। यह जमीन करीब 500 लोगों को आवंटित है,लेकिन आवास विकास दो साल से कब्जा नहीं दिला पा रहा है। जब किसानों ने ट्रैक्टर चलाया तो आवास विकास के अधिकारी मौके पर भी नहीं पहुंचे। किसानों के इस कदम से यहां अपना घर बनाने का इंतजार कर रहे आवंटियों की मुश्किलें और बढ़ी हैं।
काजीपुर, सरायकाजी के किसानों ने पहले ही एलान कर दिया था कि वह बुधवार को जागृति विहार एक्सटेंशन में ट्रैक्टर चलाएंगे। इसके बाद भी आवास विकास की नींद नहीं टूटी। सुबह से ही किसान एक्सटेंशन में ट्रैक्टर लेकर पहुंच गए थे। किसानों के संगठन के महामंत्री भारत भड़ाना ने कहा कि पहले अधिकारियों को फोन पर बताया गया लेकिन किसी ने कोई सुध नहीं ली। बढ़ा प्रतिकर और छह फीसदी विकसित भूखंड न मिलने से परेशान किसानों ने मजबूरी में यह कदम उठाया है। इस मौके पर तुलसीदास, संदीप भड़ाना, महिपाल, विक्रम सिंह, विनोद काजीपुर, ज्ञानेंद्र, अशोक काजीपुर आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन

पांचवीं दिवाली आ गई लेकिन समाधान नहीं
अर्जित भूमि किसान संगठन के अध्यक्ष हुकुम सिंह ने कहा कि पांचवी दिवाली आ गई लेकिन कोई समाधान अधिकारी नहीं ढूंढ पाए। अभी भी हम पिछले तीन महीने से लगातार धरना स्थल पर बैठकर विरोध जताते रहे लेकिन हमें सिर्फ आश्वासन मिलता रहा। इससे योजना में निवेश करने वालों और मकान बनाने का सपना देखने वाले लोगों को भी निराशा लगेगी।
चार सेक्टरों में चलाया ट्रैक्टर
किसानों ने सेक्टर-दो, तीन, पांच और सात में ट्रैक्टर चलाकर सरसों की बुवाई कर दी। अन्य सेक्टरों में पहले से ही फसल खड़ी है। किसानों ने ट्रैक्टर चलाने के बाद धरना स्थल पर बैठकर खिचड़ी खाई।
विज्ञापन

जहां चल रहा ट्रैक्टर वहां की नीलामी कर रहा परिषद
एक तरफ किसान लगातार जागृति विहार एक्सटेंशन में किसान जमीन जोतकर विरोध जता रहे हैं। वहीं, बृहस्पतिवार को आवास विकास परिषद कार्यालय में ही जागृति विहार एक्सटेंशन योजना की संपत्तियों की नीलामी की जाएगी। सवाल यह है कि नीलामी के पहले विवाद क्यों नहीं निपटाया जा रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें