एक समय था जब रोटी, कपड़ा और मकान को चुनावी मुद्दा बनाकर नेता जनता के बीच जाते थे। बेरोजगारी, विकास, भ्रष्टाचार भी प्रभावी रहते थे। इस बार नेताओं के एजेंडे में जाति-धर्म और ध्रुवीकरण का मुद्दा हावी दिखाई दे रहा है। इससे किसी दल को फायदा तो किसी को नुकसान उठाना पड़ा है। इस बार मेरठ सीट से भाजपा के अरुण गोविल, सपा-कांग्रेस गठबंधन से सुनीता वर्मा और बसपा से देवव्रत त्यागी चुनाव मैदान में हैं।
मेरठ-हापुड लोकसभा सीट की बात करें तो 2014 और 2019 के चुनावों से ध्रुवीकरण का एजेंडा भाजपा के पक्ष में रहा। इस बार भी राजनीतिक दलों की नजर ध्रुवीकरण की तरफ बताई जा रही है।