1965 के युद्ध में डोगराई विजय पाने वाली जाट रेजिमेंट ने शुक्रवार को संस्कृति रिजॉर्ट में विजय दिवस मनाया। विजय दिवस में मुख्य अतिथि मेजर जनरल बीआर वर्मा और मेजर जनरल एसएस अहलावत ने जाट रेजिमेंट की गौरवगाथा सुनाई। इस दौरान 1965 के युद्ध के किस्से सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।
मेजर जनरल एसएस अहलावत ने कहा कि राष्ट्र की एकता अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखना सैनिक का प्रथम कर्तव्य है। इतिहास बनता नहीं बनाया जाता है। 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान का डोगराई शहर फतेह कर तीन जाट बटालियन ने अविस्मरणीय इतिहास रचा था।
वहीं, 22 सितंबर शुक्रवार को मेरठ के संस्कृति रिजॉर्ट में देश के कोने-कोने से पहुंचे तीन जाट बटालियन के बुजुर्ग पूर्व सैनिकों ने इस विजय की 58वीं वर्षगांठ को जोश और उल्लास के साथ मनाया। अपने-अपने इलाके के सुंदर परिधानों में पहुंचे ये वेटरन्स एक-दूसरे के साथ गले मिलकर भावुक हो गए। इस दौरान वे अपनी भावनाओं को प्रकट करते दिखाई दिए। देखा गया कि इन सभी के चेहरों पर खुशी, जोश और आंखों में प्यार झलक रहा था। ये सभी उस ऐतिहासिक विजय को याद कर रहे थे, जिसके लिए इन्होंने अपनी जान की बाजी लगा दी थी।