डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर : मुआवजा घपला प्रकरण पर हाईकोर्ट सख्त, मांगा जवाब
मेरठ। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में चल रहे मुआवजा घपला प्रकरण में हाईकोर्ट सख्त हो गया है। पांचली खुर्द निवासी सुमित्रा देवी, धर्मदत्त और फेकू सिंह की तरफ से याचिका दायर की गई थी। जिसका संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुूए 10 विभागों से छह सप्ताह में जवाब मांगा है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। दायर याचिका में मुआवजे का भुगतान न होने और गलत लोगों को मुआवजा देने समेत करीब 19 करोड़ के घपले का आरोप लगाया गया है।
इस मामले में तत्कालीन कमिश्नर डा. प्रभात कुमार ने जांच की थी। किसानों का कहना है कि कमिश्नर ने जांच के समय कानूनगो और लेखपाल को तलब किया था। उस समय कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाने से किसानों की समस्या का निस्तारण नहीं हो सका था। किसानों ने रेलवे से अलग से खाते ख्ुालवाने के लिए कहा था, लेकिन आज तक एक भी पैसा उनके खाते में जमा नहीं हो सका। इसी बात से नाराज होकर किसान कई बार डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का कार्य रुकवा चुके हैं। कमिश्नर अनीता सी. मेश्राम ने भी जिलाधिकारी को पत्र लिखकर इस मामले की जांच करने के आदेश दिए थे।
इनसे हाईकोर्ट ने मांगा है जवाब
रेल मंत्रालय दिल्ली, चैयरमैन रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट सर्विस, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार, कमिश्नर मेरठ, जिलाधिकारी मेरठ, एडीएम वित्त एवं राजस्व मेरठ, एमडीए, तहसीलदार सदर, भूमि एवं अध्याप्ति अधिकारी।