सीडीए से पहुंचे ट्रेनी अफसर ने उनकी पहचान अंकित पंवार पुत्र सुधीर पंवार निवासी सुभाषनगर देहरादून के रूप में की। सीओ दौराला अभिषेक पटेल ने बताया कि शनिवार रात को सीडीए के सभी अधिकारी लोहड़ी मनाने के बाद सोने चले गए थे। अंकित अपने रूम में अकेले थे। रात को नौ बजे के करीब वे कमरे का ताला लगाकर बाहर निकले। अंकित मूलरूप से शामली कांधला के एलम गांव के रहने वाले थे।
आखिर पैदल इतनी दूर कैसे पहुंचे अमित, नहीं खुल रहा राज
सीडीए ऑफिसर अंकित पंवार रात को हॉस्टल से 15 किलोमीटर दूर हाईवे तक कैसे पहुंचे। उनका मोबाइल कहां गया। उनके पास एक भी रुपया नहीं मिला। ऐसे में ये सारे तथ्य हत्या की तरफ भी इशारा कर रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल ये है कि अंकित वहां पैदल क्या करने गए थे। पुलिस इन सवालों के जवाब के लिए हॉस्टल से लेकर घटनास्थल के बीच लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है।
अंकित का शव बाईपास पर बाग के पास से मिलना तमाम सवाल खड़े कर रहा है। इतनी दूर व्यक्ति पैदल नहीं जा सकता है। ऐसे में वे किसके साथ वहां गए, इसकी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। इसकी जानकारी के लिए पुलिस अंकित के मोबाइल की लोकेशन और सीडीआर की जांच कर रही है। उससे पता चल पाएगा कि उनकी लोकेशन कहां-कहां रही। मोबाइल गायब किसने किया, ये भी जांच का विषय है। उनके पास से कोई नगदी नहीं मिली।
अगर ये मान भी लिया जाए कि वे बाईपास पर किसी होटल में खाना खाने जाने जा सकते हैं तो उनके पास रुपये होने चाहिए थे। वे लोअर टीशर्ट में थे। ऐसे में ये तमाम सवाल इस पूरे मामले को उलझा रहे हैं। रोहटा रोड पर अंकित के ताऊ सुरेंद्र पंवार रहते हैं। पुलिस का कहना है कि हो सकता है कि अंकित वहीं जा रहा हो। लेकिन परिजनों का कहना है कि ताऊ को तो ट्रेनिंग का ही पता नहीं था। अंकित के चाचा सुशील पंवार ने बताया कि सोमवार को वे कंकरखेड़ा थाने में तहरीर देंगे।
कमरे की नहीं ली जा सकी तलाशी
हॉस्टल के जिस कमरे में अंकित रह रहे थे, उसकी पुलिस तलाशी नहीं ले पाई है। सीडीए के अधिकारियों ने पुलिस से कह दिया कि पहले वे इसकी जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देंगे। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया सोमवार को कमरे की तलाशी के बाद साफ होगा कि उनका मोबाइल और पर्स कमरे में था, या कहीं और गिरा है। सीडीआर से ही काफी कुछ स्पष्ट होगा। प्रथम दृष्टयता हार्ट अटैक से मौत लग रही है।
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