बैनामा प्राइवेट जमीन का, कब्जा सरकारी पर
सरकारी जमीन को कब्जा कर बेचने वाले भूमाफिया सरकार को चूना लगाने के साथ जनता से भी धोखाधड़ी कर उन्हें प्राइवेट संपत्ति बताकर सरकारी संपत्ति बेच रहे हैं। जानकारों का कहना है कि भूमाफिया लोगों को फंसाकर प्राइवेट व्यक्ति के नाम से दर्ज भूमि खसरा नंबर के नाम का बैनामा करते हैं और उनको सरकारी जमीन पर प्राइवेट खसरा नंबर दर्शाते हुए कब्जा देते हैं। इसी प्रकार सरकारी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। इस खेल में तहसील के लेखपाल व अन्य अधिकारी और नगर निगम के संपत्ति विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भूमाफिया से मिलीभगत कर भूमि सत्यापन की रिपोर्ट में गड़बड़झाला करते हैं। कई बार अधिकारियों ने स्वयं को फंसता देख कर यह भी कहा है कि जब बिल्डिंग बन जाती है तो उसकी भूमि की नाप होना संभव नहीं होता है। इन्हीं रिपोर्ट के आधार पर भूमाफिया सरकारी जमीनों पर कब्जे करते चले आ रहे हैं।
तहसील की जिम्मेदारी है
नगर निगम के संपत्ति अधिकारी राजेश कुमार का कहना है कि यह जमीन नगर निगम के प्रबंधन में है। जब भी स्थानीय लोग सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत करते हैं तो निगम की टीम कब्जे हटवाने पहुंचती है। सरकारी जमीन कहां तक है इसको नापने की जिम्मेदारी तहसील के लेखपाल और अधिकारियों की है। कई बार उन्होंने जमीन की नाप भी की है जहां तक वह सरकारी जमीन बताते हैं उसी को हमें मानना पड़ता है। तालाब की जमीन पर और अन्य जमीन पर कुछ लोगों द्वारा कब्जे किए जा रहे हैं उनको हटवा दिया गया है। जमीन की नाप कराने के लिए तहसील को पत्र लिखा जाएगा।
सरकारी भूमि (कासमपुर पहाड़ी क्षेत्र में)
खसरा नंबर रकबा (मीटर में)
138/2 1640
136/1 3410
168 250
136/3 760
136/2 510
137 4170
138/3 250
1066 2910
31 1260
33 1580
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