वेस्ट एंड रोड स्थित विवादित बंगला नंबर 210 बी जल्द ही ध्वस्त होगा। इस संबंध में हाईकोर्ट का आदेश कोर्ट की साइट पर अपलोड हो गया है। कैंट बोर्ड ने भी जल्द कार्रवाई की बात कही है।
बंगला नंबर 210 बी में 14 दुकानों के निर्माण को अवैध ठहराते हुए कैंट बोर्ड ने 1994 में ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी किया था। इसके खिलाफ पुष्पा देवी और अन्य सीनियर डिविजन कोर्ट चले गए थे। यहां से उन्हें स्टे मिल गया था। बोर्ड ने नए निर्माण के सबूत पेश किए तो कोर्ट ने स्टे खारिज कर दिया। इसके खिलाफ बिल्डर आनंद प्र्रकाश अग्रवाल ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। 13 अप्रैल 1995 को कोर्ट ने बिल्डर को नए निर्माण नहीं करने और कैंट बोर्ड को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं करने को कहा था।
आदेश के बाद भी यहां नए निर्माण होते रहे। देखते ही देखते 62 कोठियां, 24 दुकानें और आरआर मॉल समेत दो कामर्शियल कांप्लेक्स का निर्माण हो गया। अब हाईकोर्ट ने गत 1 मार्च को बिल्डर आनंद प्र्रकाश अग्रवाल आदि की अपील को सुनवाई के लायक ही नहीं मानते हुए खारिज कर दिया। लेकिन आदेश की कापी साइट पर अपलोड नहीं हो सकी थी। आदेश की कापी नहीं मिलने से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रुकी हुई थी। मामले में सीईओ राजीव श्रीवास्तव का कहना है कि कोर्ट ने कैंट बोर्ड के पक्ष में फैसला दिया है। कोर्ट का आदेश मिल गया है, इससे उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है। अब जल्द ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी।
850 करोड़ से ज्यादा है मार्केट रेट
52 हजार वर्ग मीटर में बने 210 बी के मार्केट रेट करीब 850 करोड़ हैं। डीएम सर्किल रेट 72 हजार 500 के हिसाब से जमीन की कीमत करीब 400 करोड़ बैठती है। इसके अलावा यहां बनी 62 कोठियां, 24 दुकानें, दो कांप्लेक्स और एक मॉल को शामिल कर ले तो यह कीमत 850 करोड़ तक पहुंच सकती है।
एडवोकेट कमीशन ने किया था निरीक्षण
हाईकोर्ट में कैंट बोर्ड ने नए निर्माण होने की अवमानना याचिका दायर की थी। इस पर आनंद प्रकाश अग्रवाल आदि ने नए निर्माण के बारे में मना करते हुए मरम्मत कराने की बात कही थी। मामले के बीच में ही पुष्पा देवी ने अवैध रूप से एक वसीयत आनंद प्रकाश की पत्नी मीनू अग्रवाल के नाम कर दी थी। इस तथ्य को हाईकोर्ट से छिपाया गया था। कोर्ट में लोगों ने तर्क दिया था कि यह जमीन फ्री होल्ड है, इसलिए बिना नक्शा पास कराए ही निर्माण हो सकता है। लेकिन हाईकोर्ट ने इनकी बात को नहीं मानते हुए एडवोकेट कमीशन को मौका मुआयना करने के लिए भेजा था। मुआयने के बाद कमीशन ने कोर्ट को रिपोर्ट दी कि बंगला रेजिडेंशियल है और आसपास 96 कोठियां, 24 दुकानें, दो कामर्शियल कांप्लेक्स और एक मॉल बनाए गए हैं, जो नए हैं।
बिल्डर को सुनाई थी 6 महीने की सजा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गत 13 अप्रैल 1995 को निर्माण और ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भी बिल्डर ने निर्माण जारी रखा। इस पर कैंट बोर्ड ने वर्ष 2000 में अवमानना वाद दायर कर दिया। कोर्ट ने 2008 में एडवोकेट कमीशन भेजा और उसकी रिपोर्ट पर 29 जनवरी 2014 को कोर्ट की एकल पीठ ने अवमानना की पुष्टि करते हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश जारी किए। साथ ही बिल्डर को 6 महीने की सजा सुनाई। इसके खिलाफ बिल्डर ने डबल बेंच में अपील की थी। बेंच ने गत 1 मार्च को बिल्डर की अपील को सुनवाई के योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया।