योजना में वही लोग शामिल हैं, जिनका नाम 2011 की आर्थिक जनगणना के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने शासन में दर्ज कराया था। इनमें काफी संख्या में ऐसे लोग भी शामिल हो गए थे जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं। यह मामला काफी उछला था, जिसके बाद कई ऐसे लोगों ने गोल्डन कार्ड सीएमओ कार्यालय में जमा भी कराए थे। हालांकि अभी भी काफी लोग ऐसे हैं जो इस योजना के लिए पात्र नहीं है, लेकिन पहले से पंजीकृत होने के कारण इस योजना से जुड़े हुए हैं।
निजी अस्पतालों के पंजीकरण बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयास
इस योजना में और निजी अस्पतालों को जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। पहले इनकी संख्या 55 थी, छह और अस्पताल हाल ही में जोड़े गए हैं। गोल्डन कार्ड बनाने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा, जो अभी भी कार्ड बनने से वंचित हैं, उनके कार्ड बनाए जाएंगे। - डॉ. रविंद्र सिरोहा, डिप्टी सीएमओ और नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना
प्रक्रिया की उलझनों में पड़ना नहीं चाहते निजी अस्पताल
योजना में निजी अस्पताल जुड़ने से इसलिए बच रहे हैं क्योंकि वह प्रक्रिया की उलझनों से बचना चाहते हैं। इसमें एक तो पैसा कम है, दूसरे भुगतान इलाज के कुछ दिन बाद में होता है। हालांकि इस योजना में अब इलाज की दर संशोधित हुई है, हो सकता है कुछ अस्पताल और जुड़ जाएं। - डॉ. सुशील गुप्ता, अध्यक्ष, आईएमए मेरठ शाखा