कोरोना काल में रेहड़ी-पटरी और ठेले वालों के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना पश्चिमी यूपी के जिलों में परवान नहीं चढ़ पा रही है। छह जिलों में करीब 1.40 लाख के लक्ष्य के सापेक्ष महज 2800 लोगों को ही इस योजना का लाभ मिल सका है।
लॉकडाउन के दौरान सभी का रोजगार प्रभावित हुआ। रेहड़ी-ठेले वालों के लिए तो रोजी-रोटी के भी लाले पड़ गए। केंद्र सरकार की इस योजना का उद्देश्य यह था कि जरूरतमंद रेहड़ी-ठेले, खोमचे और फेरी वालों को 10 हजार रुपये तक का ऋण सब्सिडी पर उपलब्ध कराया जाए। ऋण को 12 किस्तों में चुकाने का प्रावधान किया गया है। समय से ऋण चुकाने पर कुछ छूट भी मिलनी है। अमर उजाला ने पड़ताल की तो इस योजना की स्थिति बेहद दयनीय नजर आई।
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इस मामले में सहारनपुर के लीड बैंक मैनेजर राजेश चौधरी और नगर निगम के उप नगरायुक्त दिनेश कुमार यादव का कहना है कि योजना के क्रियान्वयन के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। लाभार्थियों का शीघ्र ही चयन कर खातों में रकम भेजी जाएगी।
एक नजर में योजना
पंजीकरण आवेदन स्वीकृत लंबित लक्ष्य
मेरठ 18745 29957 1036 4570 65000
बिजनौर 6141 9289 130 3145 तय नहीं
सहारनपुर 6200 2200 541 1659 35000
मुजफ्फरनगर 3545 2120 515 1605 17005
शामली 5972 1650 267 1383 10158
बागपत 2443 2443 316 2088 6986
आंकड़े डूडा और नगर निकाय से लिए गए हैं।
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