फसल की रक्षा के लिए पाले उल्लू
कीटनाशकों के दुष्प्रभाव से जैव विविधता को बचाने के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। मलयेशिया के पाम उत्पादकों ने फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले जंतुओं और कीटों से बचाने के लिए उल्लू को पालना शुरू किया है। उन्हें पाम पेड़ों का रक्षक मानकर उनके करीब निवास बनाकर दिया जाता है। एक हजार लकड़ी के घर उल्लू पालने के लिए बनाए गए हैं।
शिकार करने वालों की दें सूचना
एसडीओ अनिल कुमार बताते हैं कि भारतीय वन्य जीव अधिनियम, 1972 की अनुसूची एक के तहत उल्लू संरक्षित है। ये विलुप्त प्राय जीवों की श्रेणी में दर्ज है। इनके शिकार या तस्करी पर कम से कम तीन वर्ष सजा का प्रावधान है। अगर कोई उल्लू का शिकार कर रहा है तो उसके बारे में वन विभाग को सूचना दें।
उल्लू के बारे में खास
- उल्लू बुद्धिमान पक्षी होता है, ये इंसान के मुकाबले 10 गुना धीमी आवाज सुन सकता है।
- उल्लू अपने सिर को दोनों तरफ 135 डिग्री तक घुमा सकता है।
- बेहद शांत उल्लू के कान आकार में एक जैसे नहीं होते हैं।
- दुनिया का सबसे छोटा उल्लू 5-6 इंच और सबसे बड़ा 32 इंच का है।
- उल्लू अंटार्टिका के अलावा सब जगह पाए जाते हैं।
- पलकें नहीं होने के कारण इनकी आंखे हरदम खुली रहती हैं।
- उल्लू के पंख चौड़े और शरीर हल्का होता है, इस कारण उड़ते वक्त ये ज्यादा आवाज नहीं करते।
- पैरों पर बहुत सारे पर होने से ये सांप से सुरक्षित रहते हैं।
- उल्लू झुंड में नहीं रहते, ये अकेले रहना पसंद करते हैं।
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