पश्चिमांचल के चार लाख से ज्यादा नलकूप किसानों पर बकाया करीब 1400 करोड़ रुपये की वसूली में एकमुश्त समाधान योजना भी कामयाब नहीं हो पा रही है। 30 नवंबर तक चलने वाली इस योजना का लाभ अभी तक बहुत कम किसानों ने ही लिया है। किसानों का कहना है कि गन्ना बकाया भुगतान नहीं होने के चलते बकाया जमा करने में मुश्किल हो रही है। हर साल योजना जनवरी-फरवरी माह में लागू की जाती थी। तब तक किसानों के पास गन्ने का कुछ भुगतान आ जाता था। लेकिन सरकार ने इस बार योजना को पहले ही जारी कर दिया।
पीवीवीएनएल के अधिकतर किसान अपने नलकूप बिलों का भुगतान मार्च तक ही करते हैं। इसके लिए किसानों को ओटीएस का इंतजार रहता है। योजना में शत-प्रतिशत सरचार्ज की छूट और तब तक गन्ना मूल्य भुगतान होने से किसान नलकूप बिल का संपूर्ण भुगतान कर योजना का लाभ ले लेते हैं। इस बार सरकार ने ओटीएस 21 अक्तूबर को ही लागू कर दी जो 30 नवंबर तक चलनी है। इसके चलते पश्चिमांचल के 4.19 लाख नलकूप किसानों में से करीब 10 फीसदी किसान ही योजना का लाभ ले सके हैं। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने योजना की धीमी प्रगति पर कड़ी नाराजगी भी जताई है।
प्रत्येक बकायेदार को चुकाने हैं 33 हजार
पश्चिमांचल के 4.19 लाख किसानों पर करीब 1400 करोड़ रुपये बकाया चल रहा है, यानि प्रत्येक बकायेदार नलकूप किसानों पर करीब 33 हजार रुपये बकाया है। मेरठ जोन के करीब 66 हजार नलकूप किसानों पर भी करीब 165 करोड़ रुपये बकाया है। यहां के किसानों पर औसतन 25 हजार रुपये बकाया चल रहा है।
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