नहीं होगी ऑक्सीजन की कमी
कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन के लिए खूब मारामारी रही। लोग तड़पते, बिलखते और मौत के आगोश में समाते नजर आए, लेकिन अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। सरकारी हों या निजी अस्पताल, अधिकांश में ऑक्सीजन प्लांट लग चुके हैं। कोरोना के इलाज के सबसे बड़े केंद्र एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में दो ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाए गए हैं। अब मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन के 6-6 टन के दो टैंक हैं। 750 मरीजों को एक साथ ऑक्सीजन से कवर किया जा सकता है। इसके अलावा लगभग 15 दिन का बैकअप भी 24 घंटे उपलब्ध हो सकेगा।
इन निजी अस्पतालों में लगे ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट
न्यूटिमा, एनसीआर मेडिकल कॉलेज, लोकप्रिय, मिमहेन्स, आर्यावर्त, अपुसनोवा, जसवंत राय सुपर स्पेशियलिटी और केएमसी अस्पताल।
सरकारी ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट
स्थान क्षमता
मेडिकल कॉलेज 1000 एलपीएम
जिला अस्पताल 1000 एलपीएम
महिला अस्पताल 960 एलपीएम
कंन्टोन्मेंट अस्पताल 250 एलपीएम
परीक्षितगढ़ सीएचसी 150 एलपीएम
हस्तिनापुर सीएचसी 150 एलपीएम
खरखौदा सीएचसी 150 एलपीएम
रोहटा सीएचसी 200 एलपीएम
दौराला सीएचसी 333 एलपीएम
मवाना सीएचसी 45 एलपीएम
किठौर सीएचसी 250 एलपीएम
हर घंटे दो से तीन लीटर ऑक्सीजन की आवश्यकता
एलपीएम का मतलब है, लीटर पर मिनट। यानी एक मिनट में कितने लीटर ऑक्सीजन तैयार होगी। जब एक मरीज को बहुत ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है, तब हर घंटे दो से तीन लीटर की आवश्यकता होती है। - डॉ. अशोक तालियान, जिला सर्विलांस अधिकारी
तैयार है स्वास्थ्य विभाग
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग का टीकाकरण पर जोर है। कोरोना की तीसरी लहर लगभग खत्म हो चुकी है। कोरोना से संबंधित किसी भी परेशानी से निबटने के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयार है। - डॉ. अखिलेश मोहन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी