देश के इतिहास में शुक्रवार को पहली बार सबसे बड़ी सजा सुनाई गई है। अहमदाबाद में 2008 में हुए बम धमाकों के मामले में गुजरात की विशेष अदालत ने 38 दोषियों को सजा-ए-मौत की सजा सुनाई है। इनमें मेरठ और बिजनौर के भी एक-एक दोषी शामिल है। जिनमें मेरठ का जियाउर्रहमान उर्फ मोंटू पुत्र अब्दुल रहमान है।
इसके अलाला अदालत ने 11 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने पिछले मंगलवार को इस मामले में सुनवाई पूरी कर ली थी और 49 लोगों को पहले ही दोषी करार दिया था। बताया गया कि दोषियों को 13 साल बाद सजा सुनाई गई है।
मेरठ पुलिस और एलआईयू की टीम अभी जियाउर्रहमान का पता लगाने में जुटी हुई है। एसपी सिटी और सीओ एलआईयू का कहना है कि इसकी कोई जानकारी उनके पास अभी तक नहीं आई है। सभी पहलुओं पर जांच कराई जा रही है।
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बिजनौर के तनवीर को फांसी
बिजनौर के पठानपुरा का रहने वाला मोहम्मद तनवीर भी ब्लास्ट में दोषी पाया गया है। कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई है। गांव के लोगों से जब तनवीर को लेकर बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने इस मामले पर कुछ नहीं कहा।
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तनवीर की कुंडली खंगाल रही पुलिस और खुफिया विंग
साल 2008 में अहमदाबाद में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के मामले में कोर्ट ने जिन 32 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है, उनमें एक बिजनौर के पठानपुरा का रहने वाला बताया जा रहा है। बिजनौर के नजीबाबाद शहर में पठानपुरा एक मोहल्ला है, यही के रहने वाले तनवीर को भी फांसी की सजा सुनाई गई है। उसकी कुंडली खंगालने के लिए पुलिस और खुफिया विंग जुटी हुई है। उसके परिवार के बारे में भी पुलिस जानकारी जुटा रही है। हालांकि अभी तक पुलिस तनवीर के परिवार तक नहीं पहुंच पाई है और न ही उसका कोई रिकॉर्ड मिला है।
अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट के मामले में फांसी की सजा पाने वाले दोषी मोहम्मद तनवीर को नजीबाबाद में कोई नहीं जानता है। 2008 में भी नाम सुर्खियों में आने के बाद तनवीर और उसके परिजनों का पता नहीं चल सका था। पुलिस रजिस्टर में भी तनवीर नाम से अहमदाबाद बम ब्लास्ट संबंधित कोई अपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं है।