ऑनलाइन ठगी करने वाले तीन गिरफ्तार
क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने किया भंडाफोड़, नगदी व सामान बरामद
ऑनलाइन खरीद-फरोख्त करने वाली कंपनी की आड़ में कर रहे थे ठगी
मेरठ।
ऑनलाइन खरीद-फरोख्त करने वाली नामी कंपनी की की आड़ में लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का साइबर सेल ने भंडाफोड़ कर तीन ठगों को गिरफ्तार किया है। ठगों के पास से करीब एक लाख रुपये की नकदी व अन्य सामान बरामद हुआ है। पुलिस इस गिरोह का नेटवर्क खंगालने में जुटी है।
नौचंदी थाना क्षेत्र के शास्त्रीनगर निवासी गौरव सैनी पुत्र राधेश्याम ने ऑनलाइन विज्ञापन देखकर एक गाड़ी का सौदा किया था। यह गाड़ी किसी सैन्यकर्मी नवीन सिंह तोमर के नाम पर थी। संपर्क करने के बाद गौरव ने 175676 रुपये बताये गये एकाउंट में ट्रांसफर कर दिये। इसके बावजूद गौरव को कार नहीं मिली। उन्होंने नौचंदी थाने में तहरीर दी। पुलिस ने मामले में गंभीरता नहीं दिखाई तो गौरव ने एसएसपी को मामले से अवगत कराया। एसएसपी ने जांच साइबर सेल को सौंप दी। एसआई लोकेश अग्निहोत्री के टीम के साथ बृहस्पतिवार को हरियाणा के मेवात से वाजिद पुत्र शमशुद्दीन उर्फ कंचा निवासी ग्राम हतन थाना बिछौर जिला नूहू, मेवात, हरियाणा, मोहम्मद शाहजहां पुत्र अब्दुल रज्जाक निवासी रिगढ़ थाना फिरोजपुर झिरका जनपद नूहू, मेवात, हरियाणा और अकरम पुत्र जाकिर निवासी गांव उचैड़ा थाना जुरहैडा तहसील काम जिला भरपुर राजस्थान वर्तमान निवासी मेवात, हरियाणा को गिरफ्तार किया। उनका चौथा साथी भरतपुर निवासी बाल खां फरार हो गया। कई लोगों को बनाया शिकार
पुलिस के अनुसार कई लोगों को अपना शिकार बना चुका गिरोह अधिकांश विज्ञापन सैन्यकर्मी के फोटो के साथ अपलोड करते थे। इससे लोगों को शक नहीं होता था। इसके बाद पेटीएम से रुपये ट्रांसफर कराकर यह मर्चेंटों के खाते में ट्रांसफर कर देते थे। कमीशन देकर मर्चेंटों से वह अपना पैसा लेकर फरार हो जाते थे।
बैंक एकाउंट में पांच लाख की नकदी
एसआई लोकेश अग्निहोत्री ने बताया कि इन ठगों के एकाउंट में करीब पांच लाख की नकदी पड़ी है, जो ठगी से जुटाई गई थी। यह एकाउंट फ्रीज करा दिया गया है। इसके अलावा 93,320 रुपये नकद, चार मोबाइल फोन, एक आधार कार्ड, एक ड्राइविंग लाइसेंस और एक पंच बरामद किया गया है।
वर्जन-
ऑनलाइन बाजार की तरफ लोगों का रुझान बढ़ने के बाद साइबर अपराधी तेजी से सक्रिय हुए हैं। पुलिस गिरफ्त में आये तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। कुछ और सहयोगियों के पकड़े जाने की संभावना है। - योगेंद्र सिंह, प्रभारी, साइबर सेल