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दस दिन में पूरा होगा मेरठ से मुजफ्फरनगर तक ट्रैक दोहरीकरण

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दस दिन में पूरा होगा मेरठ से मुजफ्फरनगर तक ट्रैक दोहरीकरण
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फाटक को बंद न करने की मांग पर अड़े थे किसान
तीन साल की देरी से चल रहा है प्रोजेक्ट
मेरठ। दो महीने से बंद पड़े खतौली से मुजफ्फरनगर तक दोहरीकरण कार्य को हरी झंडी मिल गई है। किसानों के विरोध के कारण कार्य रोकना पड़ा था। पहले से ही तीन साल की देरी से चल रहे मेरठ से मुजफ्फरनगर तक दोहरीकरण कार्य अगले दस दिनों मेें पूरा होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक अगले एक-दो दिनों मेें फाइनल कार्य के लिए तिथि तय कर दी जाएगी।
इस दोहरीकरण के पूरा होने के बाद मेरठ से मुजफ्फरनगर का सफर मात्र 30 मिनट में पूरा हो जाएगा। जिससे दैनिक यात्रियों को सबसे अधिक फायदा होगा। मेरठ से मुजफ्फरनगर के बीच हजारों यात्री सफर करते हैं। दिल्ली की ओर जाने वाली कई प्रमुख पैसेंजर ट्रेनें भी सहारनपुर से आती हैं। खतौली से मुजफ्फरनगर तक दोहरीकरण न होने की वजह से ट्रेनों की लेटलतीफी बढ़ जाती थी। एक्सप्रेस ट्रेन को क्रास कराने के लिए पैसेंजर ट्रेनों को रोकना पड़ता था।
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इसलिए बंद था कार्य
मंसूरपुर फाटक संख्या-48 पर रेलवे की ओर से ओवरब्रिज और अंडरपास बना दिया गया था। दोहरीकरण के समय रेलवे इस फाटक को बंद करने की तैयारी में था। लेकिन किसान इसे बंद करने पर असहमति जता रहे थे। रेलवे का कहना था कि ओवरब्रिज और अंडरपास बन जाने के बाद फाटक की कोई जरूरत नहीं है।
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तीन साल में मात्र 33 किलोमीटर
साल-2016 तक मेरठ से मुजफ्फरनगर तक दोहरीकरण पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया था। लेकिन तीन साल में मात्र खतौली तक 33 किलोमीटर ही दोहरीकरण पूरा हो चुका है। इस रेलवे लाइन के दोहरीकरण के लिए मेरठ से मुजफ्फरनगर तक 377.74 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था।
मेरठ से टपरी दोहरीकरण पर एक नजर
मेरठ से खतौली - 33 किलोमीटर (कार्य पूरा)
खतौली से मुजफ्फरनगर - 22 किलोमीटर (कार्य चल रहा)
मुजफ्फरनगर से देवबंद - 22 किलोमीटर (अभी शुरू नहीं)
देवबंद से टपरी - 28 किलोमीटर (अभी शुरू नहीं)
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