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रोचक किस्सा: पाक के प्रथम प्रधानमंत्री भारत में बने थे मंत्री, कौन हैं लियाकत अली, पढ़िए- उनके बारे में सबकुछ

Tue, 19 Mar 2024 05:51 PM IST
कपिल kapil सैयद यासिर रजा, अमर उजाला, मेरठ

सार

Lok Sabha Election 2024 : पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री लियाकत अली खान भारत में भी चुनाव जीते थे। उन्हें भारत में वित्त मंत्री बनाया गया था। पढ़िए उनके बारे में सबकुछ।
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कोठी कहकशां और लियाकत अली खान का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चुनाव का आगाज हो चुका है तो कुछ ऐतिहासिक पुरानी बातें निकलना भी लाजिमी है। आज बात करते हैं आजादी से पहले के चुनाव की। कम लोगों को मालूम है कि पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री लियाकत अली खान भी मेरठ की नुमाइंदगी कर चुके हैं।

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भारत में 1945-46 में केंदीय विधानसभा के चुनाव हुए। इस चुनाव में मेरठ-मुजफ्फरनगर सीट पर मुस्लिम लीग की ओर से उम्मीदवार लियाकत अली खान ने फतह हासिल की थी। पाकिस्तान मूवमेंट में अहम किरदार निभाने वाले लियाकत अली खान का जन्म हरियाणा के करनाल के राजशाही परिवार में हुआ था। उस समय दिल्ली और यूपी को मिलाकर संयुक्त प्रांत के नाम से जाना जाता था। वहीं, मेरठ का दायरा बुलंदशहर से लेकर सहारनपुर तक था।

लियाकत अली खान इकलौते मुस्लिम लीग के नेता थे जिन्हें इस क्षेत्र में कामयाबी मिली थी। 102 सीटों वाली केंद्रीय विधानसभा में मुस्लिम लीग को केवल 30 सीटें हासिल हुईं थीं, जबकि कांग्रेस के हिस्से में 57 सीटें आईं थीं। कांग्रेस का नेतृत्व तत्कालीन शिक्षा मंत्री अबुल कलाम आजाद कर रहे थे। सरकार बनी तो लियाकत अली खान को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई और उन्होंने बजट पेश किया।

लियाकत अली खान को मेरठ में जीत यूं ही नहीं मिली थी। इस क्षेत्र में उनका अच्छा खासा रसूख था। मुजफ्फरनगर और करनाल में उनकी रियासत थी। मुजफ्फरनगर में तो कहकशां कोठी आज भी है। इस कोठी की नक्शा और नक्काशी देखने लायक है। 1947 में आजादी से ठीक पहले 14 अगस्त को पाकिस्तान अलग हो गया और लियाकत अली खान को आजाद पाकिस्तान का पहला प्रधानमंत्री चुना गया था। शारदेन स्कूल के निदेशक विश्वरत्न अब इस कोठी के मालिक हैं।

पहले मेरठ में थीं तीन लोकसभा सीटें
1952 में जब पहला चुनाव हुआ तो उसमें मेरठ को तीन हिस्सों में बांटा गया था। इसकी वजह यह थी कि उस समय मेरठ का दायरा गाजियाबाद और नोएडा से लेकर मुजफ्फरनगर तक था। जो तीन लोकसभा की सीटें 1951 में बनी थीं, उसमें मेरठ पश्चिमी, मेरठ दक्षिणी और मेरठ उत्तरी थी। आजादी के बाद के पहले चुनाव में इन तीनों सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा किया था। मेरठ पश्चिमी से खुशीराम शर्मा, मेरठ दक्षिणी से कृष्ण चंद्र शर्मा और मेरठ उत्तरी से शहनवाज खान सांसद चुने गए थे।

कांग्रेस सात और भाजपा छह बार जीत चुकी है मेरठ की सीट
शुरुआती तीन चुनावों 1952, 1957 और 1962 में कांग्रेस के शहनवाज खान सांसद चुने गए थे। 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के महाराज सिंह भारती ने शहनवाज खान को हराया। हालांकि, 1971 में शहनवाज खान कांग्रेस के टिकट पर जीते। 1977 में भारतीय लोकदल के कैलाश प्रकाश जीते। 1980 और 1984 में मोहसिना किदवई कांग्रेस से सांसद बनीं। 1989 में जनता पार्टी एस के हरीश पाल चुने गए। 1991 से 1998 के बीच तीन लोकसभा चुनाव में भाजपा के अमरपाल सिंह ने बाजी मारी। 1999 में कांग्रेस के अवतार सिंह भड़ाना जीते। 2004 में बसपा के शाहिद अखलाक ने फतह हासिल की। भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल 2009 से लगातार मेरठ के सांसद हैं।

बसपा ने श्रीपाल राणा को बनाया प्रत्याशी
बसपा हाईकमान ने कैराना लोकसभा सीट पर ठाकुर-दलित समीकरण का दांव खेलते हुए नानौता ब्लॉक के श्रीपाल राणा को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। 

कैराना लोकसभा सीट पर भाजपा ने सांसद प्रदीप चौधरी को दूसरी बार टिकट देकर चुनाव मैदान में उतार दिया था। सपा-कांग्रेस गठबंधन से हसन परिवार की इकरा हसन को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा और सपा के प्रत्याशी घोषित होने के बाद बसपा पर सभी दलों की नजरें लगी हुईं थीं। देर रात कैराना लोकसभा सीट पर सहारनपुर जिले के भावसी निवासी बीएसएफ के रिटायर्ड जवान श्रीपाल राणा को प्रत्याशी बना दिया गया। दो दिन से श्रीपाल राणा लखनऊ में ही डेरा डाले हुए थे। जबकि बसपा से टिकट पाने की जुगत में कई दावेदार थे। बसपा के जिला प्रभारी सुनील जाटव का कहना है कि श्रीपाल राणा को प्रत्याशी बनाया गया है। मजबूती के साथ चुनाव लड़ाया जाएगा।

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श्रीपाल राणा का कहना है कि राजपूत के साथ साथ दलित, मुस्लिम और सभी वर्गों का मत बसपा के साथ है, जिसके कारण बसपा कैराना लोकसभा सीट पर भारी मतों से जीत दर्ज करेगी। बताया जा रहा है कि करीब छह माह पूर्व ही राणा ने बसपा ज्वॉइन की थी।

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