लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बहुजन समाज पार्टी रविवार को उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों को लुभाने की पूरी कोशिश करेंगी।
आशियाना स्थित रमाबाई अंबेडकर मैदान में ब्राह्मण समाज भाईचारा महासम्मेलन में उनके निशान पर 16 महीने पुरानी सपा सरकार रहेगी।
वह साबित करना चाहेंगी कि ब्राह्मणों की असली हितैषी बसपा ही है। दलित-ब्राह्मण गठजोड़ की कुंजी से ही प्रदेश में सत्ता का ताला खोला जा सकता है।
ब्राह्मण समाज भाईचारा महासम्मेलन की सम्मेलन को कामयाब बनाने के लिए बसपा नेता काफी दिनों से जुटे हुए थे। शनिवार को रैली के रूप में होने वाले महासम्मेलन की तैयारियां मुकम्मल कर ली गईं।
इसमें प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र से कार्यकर्ताओं, खासतौर से ब्राह्मणों को लाया जा रहा है। महासम्मेलन से पहले बसपा करीब 36 लोकसभा क्षेत्रों में ब्राह्मण सम्मेलन कर चुकी है।
लखनऊ में पहले ब्राह्मण भाईचारा सम्मेलन को मायावती ने संबोधित किया था। इसके बाद सभी सम्मेलनों में पार्टी महासचिव सतीश चंद मिश्रा पहुंचे।
बसपा नेता तर्क दे रहे हैं कि मायावती के मुख्यमंत्री काल में ब्राह्मणों को सर्वाधिक प्रतिनिधित्व दिया गया। लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक ब्राह्मण प्रत्याशियों को मैदान में उतारा गया है। लखनऊ में भी ब्राह्मण चेहरे को रूप में नकुल दुबे पर दांव लगाया गया है।