मऊ। शहर की दो मिलों में कई दशक पहले प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से लगभग बीस हजार लोगों को रोजगार मिलता था। इनमें से एक स्पिनिंग मिल केंद्र सरकार की है तथा दूसरी काटन मिल प्रदेश सरकार की है। मिलों से जुड़े लोगों का जीवन खुशहाल था। मिलों के चलने से परिसर गुलजार रहता था। लेकिन अब इन दोनों मिलों में सन्नाटा है। इनमें लगी मशीनें जंग लगकर बेकार हो चुकी हैं। अब तक के जनप्रतिनिधियों ने इन मिलों को फिर से चलाने के केवल आश्वासन दिया है।
शहर की सबसे पुरानी काटन मिल जो पहले जयपुरिया घराने की थी। तत्कालीन सरकार ने इसका अधिग्रहण किया था। यहां पर बने सूती कपड़े प्रदेश के कई महानगरों में भेजा जाता था। शहर में बुनकरों की आबादी अधिक होने के चलते उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कांग्रेस शासन काल में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने परदहां में सन 1972 में स्पिनिंग मिल की आधारशिला रखा था। कई दशकों तक यह मिल सुचारु रूप से चलती है। इसमें एक शिफ्ट में एक साथ पांच हजार मजदूर काम करते थे। यहां पर बने धागे शहर से लेकर महानगरों तक भेजे जाते थे। लेकिन बाद में इस मिल में कर्मचारी राजनीति ने पांव पसार लिया।
आए दिन धरना प्रदर्शन, बंदी हड़ताल होते रहने से मिल जबरदस्त घाटे में चलने लगी। एक समय ऐसा भी आया कि मिल प्रबंधन ने इस बंद करने का निर्णय ले लिया। अब इस मिल की सारी मशीनें जंग लगकर बेकार हो चुकी हैं। रखरखाव के अभाव में कर्मचारियों के आवास खंडहर में तब्दील हो गए हैं। बकाए के चलते विभाग ने बिजली कनेक्शन काट दिया है। पूरा परिसर बबूल के जंगलों से ढक गया है।
काटन मिल परिसर में चलेंगे छोटे उद्योग
मऊ। घोसी के युवा भाजपा विधायक विजय राजभर ने काटन मिल को चलाने अथवा उसकी जगह पर अन्य कोई मिल चलाने के लिए शासन में सक्रिय पहल किया। लेकिन शहर के बीचोंबीच स्थित स्वदेशी काटन मिल को चलाने अथवा इस परिसर में कोई एक मिल अथवा औद्योगिक संस्थान चलाने के लिए कोई बड़ा उद्यमी तैयार नहीं हुआ। अब शासन ने निर्णय लिया है कि इस परिसर को छोटे छोटे उद्यमियों को उद्यम लगाने के लिए दिया जाएगा। वे उद्यमी अपने अपने उद्यम अपनी सुविधा के अनुसार लगाएंगे।
इस बाबत विधायक विजय राजभर का कहना है कि शासन में सक्रिय पहल की गई है जिसके आधार पर निर्णय लिया गया है कि काटन मिल परिसर में छोटे उद्यम लगाए जाएंगे। कई उद्यमियों को इसे दिया जाएगा। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा और उद्यमियों की आय भी बढ़ेगी और शहर में औद्योगिक गतिविधि को प्रोत्साहन भी मिलेगा।