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अधर में लटका 868.34 लाख के तीन कटान प्रोजेक्ट

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मऊ। जिले में प्रतिवर्ष घाघरा के कहर बरपाने से सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि नदी में विलीन होती है। जलजमाव से हजारों हेक्टेयर धान की फसल बर्बाद होती है। बाढ़ से बचाव तथा कटान से बचाने के लिए 868.34 लाख की लागत से तीन कटान प्रोजेक्ट पर कार्य तो चल रहा है, लेकिन समय सीमा बीतने के बाद भी पूरा नहीं किया जा सका है। नदी में आई बाढ़ से किसानों को भूमिहीन होने तथा कटान पीड़ितों को बेघर होने की चिंता सताने लगी है।
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शासन प्रशासन के तमाम दिशा निर्देश के बाद भी विभागीय अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। बरसात के दिनों में घाघरा प्रतिवर्ष दोहरीघाट तथा मधुबन तहसील क्षेत्र के देवारा में व्यापक पैमाने पर तबाही मचाती है। दोहरीघाट क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि नदी में विलीन हो चुकी है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से प्रतिवर्ष हजारों एकड़ धान की फसल बर्बाद होती है। किसानों को मुआवजा के नाम पर कुछ नहीं मिलता है।
घाघरा में आई बाढ़ तथा कटान रोकने के लिए दोहरीघाट कस्बा में घाघरा नदी के दाएं तट पर स्थित दोहरीघाट मुक्तिधाम के 0.350 से 0.950 के माध्यम स्टोन बोल्डर टीथ कटर एवं आरसीसी पर क्यू पाइन कटर के निर्माण कार्य की परियोजना शुरू हुई। अभी तक 62 प्रतिशत ही काम पूरा हो पाया है। जबकि बरसात शुरू होने के पूर्व ही पूरा हो जाना था।
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इसी क्रम मेें रसूलपुर में कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग की तरफ से 23 करोड़ की लागत से प्राजेक्ट शुरू किया गया लेकिन अभी तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सका है। जबकि वर्ष जून 2021 में पूरा हो जाना था। अभी 82 प्रतिशत ही काम पूरा हो सका है। मधुबन तहसील क्षेत्र के बिंदटोलिया सहित आसपास के गांवों को कटान से बचाने के लिए एक वर्ष पूर्व 12.34 करोड़ की लागत से नदी की धारा मोड़ने के लिए निर्माण कार्य डाईवर्जन चैनलाइजेशन कार्य शुरू किया गया। जून 2021 तक कार्य पूरा होना था। अभी निर्माण कार्य ठप है। प्रभारी मंत्री ने गत जून माह में दौरे में सिंचाई विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई थी, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा सका।
इस संबंध में कटान पीड़ित महेंद्र प्रसाद, रामानंद यादव, संजय प्रसाद का कहना था कि घाघरा प्रतिवर्ष दोहरीघाट तथा मधुबन क्षेत्र में तबाही मचाती है, लेकिन शासन प्रशासन की तरफ से करोड़ों की लागत से शुरू किए गए प्रोजेक्ट को समय सीमा के अंदर पूरा नहीं किया जा सका है। बाढ़ समस्या का स्थायी समाधान नहीं ढूंढा जा सका है। इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र पासवान का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ जाने से निर्माण कार्य बंद चल रहा है। नदी के सामान्य होते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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