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परिषदीय विद्यालयों में बढ़ा बच्चों का रुझान:

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मऊ। जिले के परिषदीय विद्यालयों में छात्रों का रुझान बढ़ा है। पहली बार सरकारी स्कूलों में नामांकन में लगभग 15 से 20 प्रतिशत का उछाल आया है। नामांकन में काफी बच्चें ऐसे हैं जो निजी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे थे। सरकारी विद्यालयों में अभी नामांकन प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में शिक्षक ड्रापआउट बच्चों को विद्यालयों में दाखिला दिलाने में लगे हुए हैं।
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जिले में 1060 प्राथमिक और 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। संक्रमण काल में भी सरकारी विद्यालयों में बच्चों का नामांकन बढ़ा है। नामांकन बढ़ने की कई वजह बताई जा रही है। कोरोना संक्रमण के चलते विद्यालय बंद चल रहे थे। गत सत्र में परीक्षा का आयोजन नहीं हुआ। इसलिए सरकार ने पहले ही परीक्षाएं नहीं कराने की घोषणा कर दी थी। बच्चों को अगली कक्षाओं में केवल प्रमोट करना था। इससे कई अभिभावकों ने समझा कि प्रमोट ही होना है तो प्राइवेट स्कूलों में मोटी फीस जमा कराने से क्या फायदा। वहीं, सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के बेहतर प्रयास, ऑनलाइन क्लासेज और मुहल्ला क्लास का संचालन जारी रहा। विद्यालय बंद रहने के बाद भी शासन की तरफ से मिड-डे-मील के तहत बच्चों के अभिभावकों के खाते में कनवर्जन राशि और खाद्यान्न का वितरण किया गया। इसका असर रहा कि शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों का रुझान बढ़ा। प्रतिवर्ष औसतन करीब 10 प्रतिशत नामांकन भी मुश्किल से बढ़ता था। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020-21 में 1.56 लाख बच्चों का नामांकन हुआ था। लेकिन वर्ष 2021-22 मेें परिषदीय विद्यालयों में बच्चों का रुझान बढ़ा है। प्रत्येक ब्लॉक में 15 से 20 प्रतिशत नामांकन में इजाफा हुुआ है। इस बाबत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार सिंह का कहना था कि सरकारी स्कूलों में मजबूत आधारभूत ढांचा और विभिन्न प्रकार की सुविधाएं मिल रही हैं। जिसके चलते 15 से 20 प्रतिशत नामांकन बढ़ा है।
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