घाघरा का लाल निशान की ओर बढ़ना लगातार जारी है। ऐसे में कस्बा सहित तटवर्ती इलाकों के लोगों की बेचैनी भी बढ़ती जा रही। नदी का सर्वाधिक दबाव खाकी बाबा की कुटी, डोमराम भोला का मकान, भारत माता मंदिर तथा शवदाह घाट पर है। जबकि सिचाईं विभाग ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए चेत नहीं रहा। उधर, मधुबन तहसील क्षेत्र के देवारा इलाके के संपर्क मार्ग पर पानी में डूब जाने से पशुओं के लिए चारे का संकट हो गया है। बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे। प्रशासन की तरफ से नाव तक की व्यवस्था नहीं की गई है। घाघरा रविवार को खतरे के लाल निशान से 40 सेमी ऊपर बह रही है।
प्रतिदिन नदी के जलस्तर में वृद्धि से लोगों को नुकसान की चिंता सताने लगी है। हजारों एकड़ फसल जलमग्न होने से पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। घाघरा के तटवर्ती इलाके के गांवों में पानी घुसने लगा है। इससे धनौली रामपुर, नईबाजार, चिउटीडाड़, सरया, नवली, गोधनी, जमीरा चौराडीह, पाऊस, ठिकरहिया, महुआबारी, रसुलपुर, सुरजपुर आदि गांवों की हजारों एकड फसल डूब गई है। नौली चिउटीडाड रिंग बाध तथा बीबीपुर बेलौली बंधे पर दबाव बनाए हुए हैं।
नदी का जलस्तर रविवार को 70.30 मीटर रहा। जबकि शनिवार को यह 70.25 मीटर रहा। 24 घंटे में घाघरा के जलस्तर में पांच सेमी की वृद्धि दर्ज की गई। गौरीशंकर घाट पर खतरा बिंदु 69.90 मीटर है। इस तरह नदी खतरे के निशान 40 सेमी ऊपर बह रही है। नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी रहने से मधुबन तहसील क्षेत्र के नरघाट से लीलहवा वाला मार्ग, सुग्गी चौरी, बरहजघाट मार्ग सहित तमाम मार्ग पानी से डूब गए हैं। इससे बच्चों को जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ रहा है।
खेतों में पानी भर जाने से पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। नई बस्ती, बिंटोलिया, बैरकंटा, चक्की मूसाडो़ही, चौहानपुर, बरोहा, मनमनपुरवा, सुन्नर का पुरवा, हरिलाल का पुरवा, खैरा देवार ब ईरकंटा बरोहा, नई बस्ती, जरलहवा कुडिया, हाता, बिंटोलिया, पब्बर का पुरवा सहित कई पुरवे पानी से घिर गए हैं। प्रशासन की तरफ से नावों की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। मधुबन तहसील स्थित हाहा नाले पर नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो 66.02 मीटर रहा। जबकि जबकि खतरा निशान 66.31 मीटर रहा। यहां नदी खतरा बिंदु से 29 सेमी नीचे बह रही है।