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इंजन और टायर के इंतजार में वर्कशाप में खड़ी रोडवेज की बसें

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मऊ। स्थानीय डिपो में बसों की कमी का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। विभागीय उदासीनता के कारण लगभग आधी बसों का संचालन नहीं हो पा रहा है। डिपो की कई बसें मरम्मत के अभाव में वर्कशाप में खड़ी हैं। वर्कशाप प्रबंधन बसों की मरम्मत को लेकर कोई ठोस कदम उठाता नहीं दिख रहा है। स्थिति यह है कि कई बसें काफी समय से खड़ी धूल फांक रही हैं।
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मऊ डिपो की 53 बसों में हर रोज महज 28 बसों का ही संचालन सुनिश्चित हो रहा है। परिवहन निगम के अधिकारी बसों के संचालन में चालकों और परिचालकों की कमी का रोना रो रहे हैं। स्थिति यह है कि जिले में ग्रामीण रूटों पर चलने वाली बसों का संचालन बिलकुल बंद है। लंबी रूटों पर ही बसों का संचालन किया जा रहा है। जिससे यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर के ताजोपुर स्थित रोडवेज वर्कशाप में मऊ डिपो की बसें मरम्मत के अभाव में खड़ी हैं। खराब पड़ी बसों की मरम्मत को लेकर विभाग की तरफ से कोई तेजी होती नहीं दिख रही है।
स्थिति यह है कि वर्कशाप में छह बसें खराब अवस्था में पड़ी हैं। इनमें से तीन बसों में इंजन ही नहीं लगा है। जबकि तीन बसें टायर का इंतजार कर रही है। वहीं 11 बसें ऐसी हैं जो काफी समय से चालक की बाट जोह रही हैं। हालांकि वर्कशाप प्रबंधन की तरफ से बसों की मरम्मत के लिए पूर्जों की मांग की जाती है। लेकिन लापरवाही के कारण बसों की मरम्मत समय से नहीं हो पा रही है। जिससे बसों का संचालन काफी प्रभावित हो रहा है।
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मऊ डिपो के एआरएम रमेश चंद्र ने बताया कि चालकों और परिचालकों की कमी के कारण सभी बसों का संचालन सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है। चालकों और परिचालकों की तैनाती का प्रयास किया जा रहा है। डिपो की सभी बसों की मरम्मत ताजोपुर स्थित वर्कशाप में होती है।
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