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डाक्टरों की कमी से जिला अस्पताल में इलाज प्रभावित

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मऊ। जिला अस्पताल इन दिनों चिकित्सकों की कमी के बीच जैसे-तैसे संचालित हो रहा है। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल को चिकित्सक खोजने से नहीं मिल रहे हैं। रही सही कसर चिकित्सकों के इस्तीफे और तबादले के कारण पूरी हो जा रही है। पिछले सप्ताह जिला अस्पताल में तैनात ईएनटी चिकित्सक का तबादला हो गया। अस्पताल में काफी हद तक संविदा चिकित्सकों के भरोसे मरीजों का इलाज किया जा रहा है। वहीं चिकित्सकों का लेट लतीफी और नदारद रहना भी मरीजों के इलाज में रोड़ा बन रहा है। अस्पताल प्रशासन मानव संसाधनों की कमी का रोना रो रहा है।
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जिला अस्पताल में 26 चिकित्सकों का पद है। लेकिन वर्तमान में 16 चिकित्सकों की ही तैनाती है। वर्तमान में जिला अस्पताल में दो फिजीशियन की तैनाती है, जबकि एक पद काफी समय से रिक्त है। हृदय रोग विशेषज्ञ का पद काफी समय से खाली है। ईएनटी के दो पद के सापेक्ष एक चिकित्सक की भी तैनाती नहीं है। नेत्र रोग विशेषज्ञ के दो पदों के सापेक्ष एक चिकित्सक की ही तैनाती है। दंत रोग चिकित्सक के नाम पर एक चिकित्सक तैनात हैं। जिला अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट के दो पदों के सापेक्ष एक रेडियोलाजिस्ट की तैनाती हैं। अस्पताल में एक चर्म रोग विशेषज्ञ, दो आर्थोपैडिक चिकित्सक, दो जनरल सर्जन, दो एनेस्थेटिक की तैनाती है। जिला अस्पताल में हर रोज 11 सौ से अधिक की ओपीडी है। लेकिन चिकित्सकों की कमी के बीच मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है।
हृदय रोगियों को इलाज में उठानी पड़ रही परेशानी
मऊ। जिला अस्पताल में इन दिनों हृद्य रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रही है। पिछले काफी समय से जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त चल रहा है। इस कारण हर रोज काफी संख्या में मरीजों को इलाज के लिए निजी चिकित्सालयों का रूख करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल प्रशासन चिकित्सकों की कमी को पूरा करने में नाकाफी साबित हो रहा है।
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ईएनटी में दिखाने आए मरीज परेशान
मऊ। जिला अस्पताल में इन दिनों नाक, कान तथा गला के मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले सप्ताह ही ईएनटी चिकित्सक डा. आरआर चौहान का स्थानांतरण होने के कारण उन्हें रिलीव कर दिया गया। अब जिला अस्पताल ईएनटी विशेषज्ञ विहीन है। इसके बाद भी अस्पताल प्रशासन को कोई चिंता नहीं है। हालांकि जिला अस्पताल में हर माह नाक, कान व गला रोग के चार सौ से अधिक मरीज पहुंचते हैं।
इमरजेंसी मेडिकल आफिसर के तीनों पर रिक्त
मऊ। जिला अस्पताल में आकस्मिक उपचार व्यवस्था भगवान भरोसे ही चल रही है। जिला अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल आफिसर के तीनों पद कई वर्षों से रिक्त चल रहे हैं। मरीजों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में तैनात विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जाती है। जिस कारण ओपीडी में मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। हालांकि ईएमओ की तैनाती के लिए जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रयास किया जा रहा है। लेकिन इसके बाद भी अस्पताल में ईएमओ की तैनाती नहीं हो पा रही है।
छुट्टी पर रेडियोलाजिस्ट, नहीं हो रहा अल्ट्रासाउंड-एक्सरे
मऊ। जिला अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट के दो पद हैं। लेकिन एक रेडियोलाजिस्ट की तैनाती है लेकिन वह भी नवंबर माह की शुरूआत से ही छुट्टी पर चले गए हैं। जिस कारण अल्ट्रासाउंड जिला अस्पताल में नहीं हो रहा है। इसके साथ ही मेडिकोलीगल कराने के लिए पीड़ितों को बलिया जाना पड़ रहा है। इस कारण लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
चेंबर में नहीं बैठते डॉक्टर
सहादतपुरा निवासी राघवेंद्र शुक्ला का कहना है कि वह इलाज के लिए जिला अस्पताल में सुबह 11 बजे पहुंचे थे। अस्पताल मे डाक्टर का चेंबर खुला था, लेकिन डाक्टर मौजूद नहीं रहे। बेल्थरा से अपनी पत्नी का इलाज कराने आए वसी अहमद का कहना है कि सुबह से ही वह डाक्टर को दिखाने के लिए इधर उधर भटक रहे हैं। गाजीपुर जनपद के महिपालपुर निवासी रामबृक्ष ने बताया कि आए दिन अस्पताल में चिकित्सक अपने चेंबर में नहीं बैठते हैं। वह जब भी अस्पताल में आए हैं, उन्हें काफी परेशानी हुई है। लिलारी भरौली निवासी रामजीत यादव ने बताया कि वह सुबह नौ बजे से ही अस्पताल पहुंच गए थे, लेकिन दोपहर बाद एक बजे तक वह डाक्टर का इंतजार ही करते रहे।
जिला अस्पताल के सीएमएस बृज कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। समय-समय पर रिमाइंडर भेजा जाता है। मानव संसाधनों की कमी के बीच जिला अस्पताल में मरीजों का इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है।
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