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अफगानिस्तान: काबुल में फंसा मऊ का लाल, स्टील प्लांट में करता है काम, सलामती की पूरा गांव कर रहा दुआएं

Thu, 19 Aug 2021 07:49 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, मऊ

सार

पत्नी ने बताया कि उनके पति उन्हें बार-बार दिलासा दे रहे हैं कि वह अपनी फैक्ट्री में कुशलता पूर्वक हैं। उनके साथ 35 अन्य भारतीय और दूसरे लोग भी हैं। पत्नी ने पति सहित दूसरे भारतीयों को अफगानिस्तान से उनके घर पहुंचाने के लिए प्रदेश तथा केंद्र सरकार से गुहार लगाई है।
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परेशान युवक की पत्नी, बेटी और पिता। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मऊ जिले के कोपागंज ब्लॉक के जयरामगढ़ निवासी वीरेंद्र राजभर के अफगानिस्तान में फंस जाने से जहां परिजन परेशान हैं तो वहीं गांव में उनकी सलामती के लिए प्रार्थना की जा रही है। वीरेंद्र काबुल में एक स्टील प्लांट में काम करते हैं।

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गुरुवार को अमर उजाला की टीम जयरामगढ़ पहुंची और वीरेंद्र की पत्नी ज्ञांती देवी तथा पिता अवध राजभर से मिलकर उनके कुशलता के बारे में जानकारी ली। ज्ञांती देवी ने बताया कि उनकी वीरेंद्र से नियमित रूप से  दिन में तीन से चार बार वीडियो काल से बातचीत हो रही है। ज्ञांती देवी ने अमर उजाला टीम के समक्ष ही वीडियो काल से वीरेंद्र से बातचीत की।

ज्ञांती देवी ने बताया कि उनके पति उन्हें बार बार दिलासा दे रहे हैं कि वह अपनी फैक्ट्री में कुशलता पूर्वक हैं। उनके साथ 35 अन्य भारतीय और दूसरे लोग भी हैं। ज्ञांती ने पति सहित दूसरे भारतीयों को अफगानिस्तान से उनके घर पहुंचाने के लिए प्रदेश तथा केंद्र सरकार से गुहार लगाई है।

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वीरेंद्र के पिता अवध ने बताया कि अफगानिस्तान में जो लोग वहां फंसे है, उनके परिजन उनकी सलामती के लिए काफी चितिंत हैं। वीरेंद्र वापसी के लिए हर ग्रामीण भगवान से प्रार्थना कर रहा है।
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होली पर गांव आए थे वीरेंद्र
जयरामगढ़ गांव में कई लोग विदेशों में काम करते है। गांव निवासी रामकेवल ने बताया कि वीरेंद्र रिश्ते में उसके चाचा हैं। पांच वर्षो से वह अफगानिस्तान में स्टील फैक्ट्री में काम करते हैं। मार्च माह में होली पर वह एक माह की छुट्टी पर आए थे। वीरेंद्र के पड़ोसी मनोज कुमार ने बताया कि वीरेंद्र काफी मिलनसार स्वभाव के है, उनके सकुशल वापसी के लिए वह खुद चितिंत है। गांव की चंपा देवी तथा देवंती देवी ने बताया कि गांव के हर घर में वीरेंद्र की सकुशल वापसी को लेकर प्रार्थना हो रही है। महिलाएं पत्नी ज्ञांती देवी को ढांढस बंधा रही हैं तो पुरुष वीरेंद्र के पिता अवध का मनोबल बढ़ाते हुए हिम्मत बंधा रहे हैं। 
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