मुहम्मदाबाद गोहना (मऊ)। देश की आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में 21 फरवरी 1967 को चौथे आम विधानसभा के लिए चुनाव कराया गया। इस दौरान तत्कालीन आजमगढ़ और वर्तमान में मऊ जनपद की विधानसभा क्षेत्र में कुछ ऐसा भौगोलिक और राजनैतिक परिवर्तन हुआ कि आम लोगों की जानकारी के लिए इसका जिक्र किया जाना जरूरी है। इसी चुनाव के दौरान पहली बार मऊ विधानसभा का अस्तित्व कायम हुआ। वर्ष 1967 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनसंघ ने जनपद में अपनी उपस्थिति दर्ज कराया। वर्ष 1967 के पूर्व अनारक्षित मुहम्मदाबाद गोहना विधान सभा क्षेत्र को इस चुनाव के पूर्व पूरी तरह से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया और यहां से कांग्रेस के श्रीनाथ तीसरी बार विधायक चुने गए थे।
इस चुनाव के पूर्व मऊ विधानसभा का नाम कोपागंज विधानसभा हुआ करता था लेकिन 1967 में कोपागंज विधान सभा क्षेत्र का नाम बदलकर मऊ कर दिया गया था। उस समय जनपद में भाकपा का बोलबाला था और भारतीय जनसंघ अपनी जड़े मजबूत करने का प्रयास कर रही थी। मऊ विधानसभा के गठन के बाद यहां से भारतीय जनसंघ से चुनाव लड़ रहे ब्रज मोहन दास अग्रवाल ने 20,867 मत पाकर कांग्रेस के हबीबुर्रहमान को पराजित किया और पहली बार क्षेत्र में भारतीय जनसंघ का परचम फहराया। इसी चुनाव के दौरान अनारक्षित मुहम्मदाबाद गोहना विधानसभा क्षेत्र को पूर्ण रूप से आरक्षित घोषित कर दिया गया और तब से आज तक लगभग 55 सालों तक यह विधानसभा अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित है। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी के श्रीनाथ ने 12,496 वोट पाकर भारतीय जनसंघ के दीपा राम को पराजित किया और वह तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुए थे।