नगर के हनुमान घाट पर बुधवार को तमसा नदी में खड़ी होकर सूर्योदय की राह देखतीं व्रती महिलाएं।
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सुख समृद्धि, पति और पुत्र की दीर्घायु वाले महापर्व छठ पर बुधवार को व्रती महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। साथ ही मंत्रोच्चार के बीच संकल्प को पूरा किया। वहीं पति की दीर्घायु और परिवार की मंगल कामना के साथ पुत्र प्राप्ति की मन्नतें मांगी। इससे पूर्व महिलाएं किरण फूटने तक नदी, तालाबों और पोखरों के पानी में खड़ी होकर पूजा में लीन रहीं। उधर, नदी तटों और पोखरों के पास तड़के आतिशबाजी भी की गई।
सूर्य की किरण फूटते ही जिले के हर ताल, तलहटी, नदी पोखरों पर पटाखे की गूंज और गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। महिलाएं अपना डाल उठाए घर को रवाना हुई और प्रसाद ग्रहण कर लोगों में वितरण भी किया। नदी और पोखरों के घाटों पर पूरी तरह से मेले जैसा दृश्य नजर आया। इस दौरान प्रकाश की भी व्यवस्था की गई थी। खासतौर से तमसा और सरयू तट पर श्रद्धालु महिलाओं की भीड़ उमड़ी। व्रती महिलाएं छठ पूजा के लिए सूप और डलिया लेकर पूजा सामग्री और फलों आदि सजाकर घाटों पर भोर में पहुंच गईं। नगर क्षेत्र के तमसा तट पर स्थित भीटी, हनुमानघाट, ढेकुलियाघाट, रामघाट, बमघाट, मड़ैयाघाट सत्तीघाट, नागा बाबा की कुटी आदि स्थानों पर महिलाओं की भारी संख्या देखी गई।
नगर क्षेत्र के ब्रह्मस्थान पोखरा, शीतला माता धाम, वनदेवी धाम स्थित पोखरा पर भी भारी संख्या में जुटी महिलाओं ने विधि विधान से भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया। महिलाओं के साथ परिवार के लोगों ने भी पूजा अर्चना में अपना सहयोग दिया। व्रती महिलाओं के साथ परिवार वाले सूप और डालिया में पूजन अर्चन की सामग्री लेकर घाटों और पोखरोें के लिए रवाना हुए। कई अपने वाहनों सें पूजास्थल तक पहुंचे थे। उत्साही बच्चे भी गन्ने हाथों में लेकर चल रहे थे। छठ पूजा के बाद महिलाओं ने एक दूसरे को सिंदूर लगाया और प्रसाद का वितरण भी किया।