अंजान नंबरों पर फोन कर महिलाओं को प्रेम जाल में फंसाने की आदत एक युवक को भारी पड़ गई। उसने महिला को फंसाने के लिए फोन किया, लेकिन उल्टा वह खुद ही हत्या के आरोप में फंस गया। बाद में जांच के बाद पुलिस ने उसे निर्दोष पाया।
आगरा के बिल्लोचपुरा स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर 12 अप्रैल 2024 को एक किशोर का क्षत विक्षत शव मिला था। मृतक की पहचान बरसाना थाना क्षेत्र के गांव बड़ोखर में रहने वाले जोगेंद्र के रूप में हुई थी। पोस्टमार्टम के बाद किशोर का शव परिजन को सौंप दिया गया था। तब जीआरपी ने किशोर की मौत को आत्महत्या बताया था। जबकि परिजन को हत्या की आशंका थी। मृतक के पिता विजेंद्र ने अदालत के आदेश पर 31 दिसंबर 2024 को आगरा के हरीपर्वत थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
इसमें उन्होंने 11 अप्रैल 2024 को जोगेंद्र के फोन पर एक अंजान नंबर से आई फोन कॉल को आधार बनाया था। उन्हें शक था कि हो न हो यही फोन कॉल उनके बेटे की मौत का कारण है। बाद में विवेचना 10 मार्च 2025 को जीआरपी मथुरा को स्थानांतरित कर दी गई।
जीआरपी थाना प्रभारी निरीक्षक यादराम सिंह ने बताया कि जोगेंद्र के फोन पर जिस अंजान नंबर से कॉल आई थी, उसकी पहचान चंदौसी निवासी वकील के रूप में हुई। पुलिस उसे थाने लेकर आई और कड़ाई से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह अंदाजा लगाकर नंबर मिलाता था। अगर कोई महिला फोन उठाती तो उससे बात कर उसे फंसाने की कोशिश करता था।
जब उसने जोगेंद्र के मोबाइल पर फोन किया तो उसकी बहन ने फोन उठाया था। वह उससे बात कर उसे प्रेम जाल में फंसाने का प्रयास कर रहा था। उसे नहीं पता था कि उसका यह प्रयास उसे हत्यारोपी बना देगा। हत्या का आरोप सिद्ध न होने पर पुलिस ने मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी है।