मथुरा। मरीज का गलत इलाज करना चिकित्सक को भारी पड़ गया। उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग हाथरस ने चिकित्सक को मरीज के परिजन को आठ लाख रुपये देने का आदेश किया है।
अधिवक्ता आशुतोष मिश्रा ने बताया कि चंद्र प्रकाश निवासी मंडी समिति की पत्नी पुष्पा देवी को पित्त की थैली में पथरी थी। तबियत बिगड़ने पर 29 जून 2014 को हाईवे स्थित एक हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। यहां पर चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराया। बताया गया कि पुष्पा की पित्त की थैली में पथरी है। इसके बाद हॉस्पिटल के चिकित्सक ने 2 जुलाई को पुष्पा का ऑपरेशन कर पित्त की थैली निकाल दी। लेकिन चिकित्सक ने पुष्पा की पित्त की थैली के ऑपरेशन के दौरान नली काट दी, जिससे उसकी तबियत बिगड़ गई।
इसके बाद पुष्पा को पीलिया हो गया। जब वह मरणासन्न स्थिति में पहुंच गई तो चिकित्सक ने आगरा के एक अस्पताल में रेफर कर दिया। जहां पर 50 हजार का स्टेन डाल दिया। इसके बाद एक दूसरे अस्पताल में पहुंचे, यहां के चिकित्सक ने एमआरसीटी कराया, जिसमें पता लगा कि पित्त की थैली की नली टेढ़ी हो गई। काफी इलाज के बाद भी छह महीने बाद पुष्पा को कैंसर घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में पहुंचे। यहां पर मरीज का कैंसर का इलाज हुआ। जहां से वृंदावन के एक अस्पताल लाए, जहां 7 अगस्त 2016 को उसकी मौत हो गई।
अधिवक्ता ने बताया कि पति चंद्र प्रकाश द्वारा वर्ष 2016 में उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में मथुरा के हॉस्पिटल के संचालक व पैथालॉजी संचालक के खिलाफ वाद दाखिल किया। वाद की सुनवाई के दौरान प्रतिवादीगण द्वारा निर्णय की सुनवाई को हाथरस फोरम में केस स्थानांतरण करवा लिया गया। वाद का निर्णय करते हुए हाथरस उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने 10 नवंबर 2021 को निर्णय दिया कि अस्पताल के संचालक द्वारा छह लाख रुपये वादीगण को दिए जाएं व दो लाख रुपये पैथालॉजी संचालक द्वारा वादीगण को दिए जाएं।