मथुरा। देश के पहले प्रधानमंत्री और बच्चों के चाचा जवाहरलाल नेहरू का भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली से गहरा नाता है। उनके जन्म के लिए मां स्वरूपरानी नेहरू ने अनुष्ठान किया था। नेहरू का अस्थि कलश आज भी राजकीय संग्रहालय मथुरा में मौजूद है। बता दें कि रविवार को चाचा नेहरू की जयंती मनाई जाएगी।
स्वतंत्रता आंदोलन में जवाहर लाल नेहरू का मथुरा कई बार आगमन हुआ। वह महात्मा गांधी के साथ भी यहां कई बार आए। होलीगेट स्थित जिला अस्पताल के निकट पुराने पोस्ट ऑफिस में गांधी जी के साथ ठहरे। उनका वृंदावन सहित मथुरा के विभिन्न क्षेत्रों में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान आगमन हुआ था। यहां के पुरोहितों का कहना है कि जवाहर लाल नेहरू की मां स्वरूपरानी ने पुत्र प्राप्ति के लिए मथुरा में यमुना के किनारे 1988 में कल्पवास कर अनुष्ठान किया था।
इस दौरान उन्होंने 30 दिन तक विधिविधान पूर्वक अनुष्ठान किया था। 1889 में जवाहरलाल नेहरू के जन्म के बाद पिता मोतीलाल नेहरू ने यमुना किनारे तालाब गली में कश्मीरी धर्मशाला का निर्माण कराया, जो आज भी जर्जर हालत में मौजूद है। वर्ष 1964 में जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद विसर्जन के लिए अस्थि कलश लाया गया। यह कलश राजकीय संग्रहालय में संरक्षित है।