मथुरा। बुद्ध विहार डिपो के परिचालक की संविदा समाप्त कर दी गई है, वहीं बस का अनुबंध भी खत्म कर दिया गया है। बुद्ध विहार डिपो अलीगढ़ के एआरएम ने यह पूरी रिपोर्ट लखनऊ में परिवहन निगम के एमडी को सौंप दी है तो मथुरा डिपो के एआरएम ने आगरा के आरएम को भी रिपोर्ट सौंपी है। दोनों रिपोर्टों में चालक और परिचालक को जिम्मेदार ठहराया गया है।
१४ फरवरी को पुराने बस अड्डे पर बुद्ध विहार की अनुबंधित बस में लगी आग से तोशीबा कंपनी के जीएम शैलेश उपाध्याय जिंदा जल गए थे। इतनी बड़ी घटना के बाद परिवहन निगम में खलबली मच गई थी। अलीगढ़ और मथुरा के परिवहन निगम के अफसरों ने जांच करके दोषी चालक और परिचालक को पाया, वहीं स्टेशन प्रभारी की लापरवाही पाई गई।
लापरवाही पर स्टेशन प्रभारी प्रेम सिंह को निलंबित कर दिया गया, वहीं बुद्ध विहार के परिचालक की संविदा खत्म कर दी गई और बस का अनुबंध भी खत्म कर दिया गया है। बस का अनुबंध २०२४ तक का था। यह बस अलीगढ़ के बन्नादेवी के रहने वाले भगवान सिंह की है। बस स्वामी का प्राइवेट चालक था। चालक तेजवीर बुलंदशहर के डिबाई का रहने वाला है, जबकि परिचालक सुरेश अलीगढ़ के गोंडा का रहने वाला है।
बुद्ध विहार के एआरएम योगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि परिचालक की संविदा समाप्त कर बस का अनुबंध खत्म कर दिया गया है। इसके अलावा चालक बस स्वामी भगवान सिंह निवासी गुरु रामदास नगर का प्राइवेट था। बस जलने के मामले की पूरी रिपोर्ट एमडी को सौंप दी गई है।
नहीं चढ़ सके चालक-परिचालक पुलिस के हत्थे
चालक तेजवीर और परिचालक सुरेश की तलाश में कोतवाली पुलिस दबिश दे रही है, लेकिन बृहस्पतिवार को भी दोनों पुलिस की पकड़ से दूर रहे। चार दिन बीतने के बाद भी पुलिस दोनों आरोपियों को पकड़ नहीं सकी है। कोतवाल विजय कुमार सिंह का कहना है कि चालक और परिचालक को पुलिस की टीम तलाश रही है। जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी।
२०२१ में खत्म हो गया था अनुबंध, २०२४ तक किया नवीनीकरण
भगवान सिंह निवासी गुरु रामदास नगर का २०१६ में ५४ सीटर बस का अनुबंध १५ सितंबर तक की अवधि तक बुद्ध विहार डिपो से हुआ था। अवधि समाप्त होने के बाद इस बस का अनुबंध १६ सितंबर २०२१ से १५ सितंबर २०२४ तक बढ़ा दिया गया। तीन साल के लिए अनुबंध का नवीनीकरण किया गया। अलीगढ़ के आरएम कार्यालय में यह अनुबंध बढ़ाया गया। पुराने बस अड्डे पर १४ फरवरी को लगी आग से तोशीबा कंपनी के जीएम शैलेश उपाध्याय की जिंदा जलकर मौत हो गई। इतनी बड़ी वारदात का जिम्मेदार मृतक के परिजनों ने भी परिवहन निगम के अफसरों और चालक-परिचालक पर लगाया था।
अफसरों ने अपनी कमियां छुपाईं, स्टेशन प्रभारी पर गिरा दी गाज
आखिरकार परिवहन निगम के अफसरों ने अपनी कमियां छुपाने के लिए पुराने बस अड्डे के प्रभारी प्रेम सिंह पर गाज गिरा दी। सिस्टम को दरकिनार करते हुए इस आगजनी में समय पर न पहुंचने व अन्य जिम्मेदारियों में लापरवाही बताते हुए स्टेशन प्रभारी को निलंबित कर दिया। दो दिन बाद अचानक हुई कार्रवाई से परिवहन निगम के कर्मचारियों में भी हड़कंप मच गया। आखिर स्टेशन प्रभारी की क्या गलती थी। यह दबी जुबान में कर्मचारी कह रहे हैं। केवल अपनी कमियों को छुपाने के लिए स्टेशन प्रभारी को निशाना बनाया गया। सबसे पहले स्टेशन प्रभारी से ही परिवहन निगम के अफसरों ने चालक-परिचालक के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। उसके बाद यह निलंबन की कार्रवाई की है।