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परफॉर्मेंस ग्रांट: एट-पार ठेका हथियाने के लिए टेंडर कमेटी निशाने पर

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मथुरा। अमर उजाला की खबर के बाद 77 करोड़ रुपये की परफार्मेंस ग्रांट में एट-पार का खेल कर मोटी कमाई का ख्वाब देख रहे ठेकेदारों में खलबली है। उनके द्वारा टेंडर कमेटी को निशाने पर ले लिया गया है। बताया जा रहा है कि टेंडर कमेटी एट-पार के ठेकों का विरोध कर रही थी। अपनी बात को सही साबित करने के लिए इससे जुड़े अधिकारी अन्य जनपदों का डाटा मंगाने की तैयारी कर रहे हैं।
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77 करोड़ रुपये के परफार्मेंस ग्रांट के कामों में बड़े घोटाले के लिए जाल बिछा रहे ठेकेदारों द्वारा अब दस लाख से अधिक के कामों में वही खेल किया जाएगा जो कि दस लाख से कम कीमत को कामों में उन्होंने किया है। सांठगांठ से उनके द्वारा एट-पार ही टेंडर हासिल किए जाएंगे। जिससे वह मोटी कमाई कर सकें। अमर उजाला में समाचार के बाद इससे जुड़े अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर उंगली उठने लगी।
अपनी बात को सही साबित करने के लिए अधिकारी अब अन्य जनपदों का एट-पार का डाटा मंगवा रहे हैं। जबकि सच्चाई यह है जनपद में ग्राम पंचायत स्तर से एट-पार का खेल चल निकला और केवल एक काम के लिए अधिकतम तीन टेंडर ही बेचे गए। उधर, ठेकेदार और अधिकारियों इसका विरोध कर रही टेंडर कमेटी को परिवर्तित करने की तैयारी में है।
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वर्तमान में जिलाधिकारी द्वारा स्वीकृत टेंडर समिति में अधिशासी अभियंता लोनिवि प्रांतीय खंड, अधिशासी अभियंता जल निगम द्वादश शाखा, अधिशासी अभियंता विद्युत (ग्रामीण), परियोजना अधिकारी (नेडा), संबंधित पंचायतों के बीडीओ, ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत सचिव हैं। सीडीओ डॉ. नितिन गौड़ ने बताया कि उन्हें जो शिकायतें मिल रहीं हैं वह जांच कर रहे हैं।
क्या है एट-पार टेंडर
जब भी किसी काम का ठेका उठता है तो उस काम को किए जाने की कीमत डीपीआर के आधार पर सरकार तय करती है। टेंडर समिति सहित सभी सरकारी अधिकारियों का दायित्व है सरकार को फायदा देने के लिए वह उस कीमत से कम यानि कि बिलो टेंडर लिए जाएं। इसके लिए आवश्यक है टेेंडर डालने वाले ठेकेदारों की संख्या अधिक हो। जबकि कोई ठेकेदार तय कीमत से कम काम करने का वायदा करता है तो उसे बिलो टेंडर तक अधिक कीमत में काम करने की कहता है तो उसे एबव टेंडर कहते हैं लेकिन यदि मात्र पांच प्रतिशत कम या उससे और कम करने के लिए टेंडर लेता है तो उसे एट-पार टेंडर कहा जाता है।
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