नंदगांव। द्वार पर हाथों में माखन-मिश्री लिए कृष्ण बलराम के आने का इंजातर करती ग्वालिनें, कंधे पर कृष्ण-बलराम के स्वरूपों को प्रसाद लूटने के लिए घर-घर ले जाते सैंकड़ों ग्वाल बालों का टोल। बृहस्पतिवार को कुछ ऐसा नजारा श्रीकृष्ण की प्रथम गोचारण स्थली नंदगांव में देखने को मिला। गोचारण लीला का ये दृश्य द्वापर की लीला को जीवंत कर रहा था।
मान्यता है कि नंदगांव निवास के दौरान नंद-यशोदा ने गर्ग ऋषि से गाय चराने का मुहूर्त निकलवाया। द्वापर कालीन लीला को जीवंत करने के लिए गोस्वामी कुमारों को श्रीकृष्ण व बलराम के स्वरूपों में सजा कर घर-घर ले जाया गया। आनंदघन बाबा की मूर्ति के पास गोस्वामी वर्ग के छोटे-छोटे दो बालकों को श्रीकृष्ण व बलराम के रूप में सजाया गया। दोपहर में ग्वालवालों के साथ कृष्ण बलराम नंदभवन पहुंचे। नंदभवन में समाज गायन किया गया।
इसके बाद श्रीकृष्ण-बलराम सखा स्वरूप गोपों के साथ कारे मंदिर, हाऊविलाऊ, यशोदा कुंड, नंदबैठक, वंटा वाली कुंज होते हुए कदंब टेर पहुंचे, जहां बरसाना से गोपी छाक लेकर बैठी थीं। कन्हैया ने ग्वालवालों के साथ छाक ली। नंदभवन, खूंटा, कारेलय, यशोदा कुंड, कदंब टेर, आशेश्वर, नंदबगीचा आदि स्थलों पर समाज गायन के दौरान प्रथम गोचारन कौ दिन आज, गाय चरावन कौ दिन आयौ, तुम जो मनावत सोई दिन आयौ, अहो दधि मथत घोष की रानी आदि पदों का गायन किया गया।