वहीं नई बस्ती की ओर से याकूब शाह ने सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता राधा तरकर द्वारा 14 अगस्त को रिट दायर की थी। इस पर बुधवार को सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ ने दस दिन तक यथास्थिति के आदेश दिए हैं। साथ ही रेलवे को एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।
यह भी पढ़ें- Independence Day: आगरा में ताज के साये में विदेशी पर्यटकों ने भी फहराया तिरंगा, धूमधाम से मना स्वतंत्रता दिवस
सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता राधा तरकर ने बताया कि उन्होंने कोर्ट में रिट दायर कर कहा कि नई बस्ती में लोग 1888 से रह रहे हैं। जबकि, इसके बाद मथुरा-वृंदावन के बीच रेलवे लाइन डाली गई है। उन्होंने कोर्ट के समक्ष यह बात रखी कि मथुरा के सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में मामला लंबित हैं। इसके बावजूद रेलवे ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की है। राष्ट्रीय लोकदल के नेता कुंवर नरेंद्र सिंह ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने नई बस्ती के गरीबों को न्याय प्रदान कर दिया है। हालांकि न्याय विलंब से मिला है।
यह भी पढ़ें- आगरा नगर निगम: मनमाने तरीके से चेक बना रहा लेखा विभाग का क्लर्क, मेयर ने लिखा पत्र- इसे हटाकर करें कार्रवाई
नई बस्ती में 135 मकानों को ध्वस्त किया गया है। उन्होंने शासन से मांग की है कि जिनके मकान ध्वस्त हुए हैं उन मकान मालिकों को 15 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। साथ ही 100 गज जमीन आवंटित की जाए। अल्पसंख्यक सभा की प्रदेश प्रवक्ता शबनम कुरैशी ने प्रदेश के राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा है। इसमें नई बस्ती के लोगों को मुआवजा देने की मांग की है।