फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जगते ही आंखे मलने लगे लोग, यकायक बढ़ गया आसमान में प्रदूषण

विज्ञापन
विज्ञापन
मथुरा। शनिवार को जगते ही मथुरा-वृंदावन वासी आंखें मलने लगे। आसमान में धुंध के साथ आंखों में जलन ने लोगों को बेचैन कर दिया। यह स्थित काफी देर तक बनी रही। दोपहर के बाद हल्की सी हवा के झोंके के आने के बाद आसमान साफ हुआ और लोगों ने इस नई मुसीबत से राहत की सांस ली। इस दौरान वृंदावन देश के सबसे प्रदूषित टॉप टेन शहरों में शामिल रहा, जबकि मथुरा में भी वायु प्रदूषण निर्धारित मानक से अधिक रहा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का मानना है कि दशहरा पर दशानंद रावण के जगह-जगह पुतला दहन और आतिशबाजी के चलते यह स्थिति अचानक पैदा हो गई।
विज्ञापन

शुक्रवार को दशहरा का त्योहार धूमधाम के साथ मनाया गया। जगह-जगह रावण का पुतला दहन हुआ और बडे़ स्तर पर आतिशबाजी की गई। पटाखे फोडे़ गए। इससे उत्पन्न प्रदूषण का असर शनिवार को प्रात:काल वातावरण पर देखने को मिला। वातावरण में धुंध छा गई। लोगों को जगने के साथ ही आंखों में जलन का अहसास हुआ। मॉर्निंग वॉक पर गए मथुरावासी भी इससे परेशान नजर आए।
प्रदूषण के प्रभाव से बुजुर्गों की आंखों में कुछ ज्यादा तकलीफ हुई। वृंदावन की स्थिति बेहद चिंताजनक रही। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदूषण के मामले में श्रीबांकेबिहारी की नगरी वृंदावन देश के टॉप टेन प्रदूषित शहरों में शामिल हो गई। वृंदावन में एयर क्वालिटी इंडेक्स 292 दर्ज किया गया है, जो देश में वृंदावन को नौवां स्थान रहा। इसका कारण दशहरा के आयोजन के साथ ही वृंदावन में वीकेंड के दौरान अत्याधिक वाहनों का आना भी माना जा रहा है। मथुरा शहर में यह मानक 120 से 150 एक्यूआई तक रहा है।
विज्ञापन

दशहरा पर रावण का पुतला दहन से बड़ी मात्रा में प्रदूषण उत्पन्न हुआ है। वृंदावन में वाहनों का आना भी इसके बढ़ने का बढ़ा कारण है। इससे शनिवार को आसमान में धुंध रही। लोगों को त्योहारों के दौरान आतिशबाजी से बचना चाहिए।
डॉ. अरविंद कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मथुरा
वायु प्रदूषण के चलते लोगों को आंखों की समस्या उत्पन्न होने लगती है। सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को दिक्कत होती है। ऐसे में आंखों को पानी डालकर कई बार साफ करना चाहिए। मॉस्क का भी उपयोग बराबर बनाए रखें। दीपावली के दौरान यह स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है।
विज्ञापन

- डॉ. गौरव भारद्वाज, चिकित्सक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें