मथुरा। संस्कार भारती का 57 सदस्यीय यात्री दल देशभक्ति के उल्लास के साथ बलिदानी व पौराणिक स्थलों का अवलोकन कर लौट आया है। दल 17 अक्तूबर को महाविद्या चौराहे से बसों से कुरुक्षेत्र पहुंचा। वहां पौराणिक ब्रह्मकुंड में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। इसमें महाभारत युद्ध के आरंभ में पड़े पूर्ण सूर्य ग्रहण उपरांत प्रभु श्रीकृष्ण, पांडवों व कौरवों ने स्नान किया था। रण स्थली में विद्यमान उस पौराणिक बरगद के पेड़ को भी देखा जिसके नीचे खड़े रथ में विराजे श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।
पौराणिक भीष्म कुंड, जहां अर्जुन ने धरती पर तीर चला कर मृत्यु शैय्या पर पड़े पितामह भीष्म की प्यास तृप्त कराई थी। दल अमृतसर पहुंचा, जहां स्वर्ण मंदिर में हरमिंदर साहब के दर्शन किए व पवित्र सरोवर के नीर का आचमन किया। बलिदानी स्थल जलियां वाला बाग भी देखा। दल पूर्व डीजीपी पंजाब आंगड़ा के निमंत्रण पर बीएसएफ के अतिथि के रूप में अटारी बाघा बॉर्डर पहुंचा। वहां उसने शौर्यता के प्रतीक फ्लैग ऑफ सेरेमनी को देखा।
यात्रीदल का कुरुक्षेत्र में विकास प्राधिकरण हरियाणा के इंजीनियर अनुज वशिष्ठ, गीता वशिष्ठ व निर्मल वशिष्ठ ने स्वागत किया। यात्रीदल में नीलम, सुरेंद्र सक्सैना, कमलेश, शिव कुमार गुप्ता, अनीता, हृदेश शर्मा, दमयंती, जितेंद्र कटारा, रेखा माहेश्वरी, चारू सिंघल, सीमा, संगीता, कल्पना सारस्वत, नंदिनी भार्गव, रत्ना, नवीन सक्सैना, मधु, योगेंद्र शर्मा, सविता, रवि चंद्र मंगल, फुलवा, विजेंद्र राजपूत, मिथिलेश, महेश खंडेलवाल आदि शामिल थे।