मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की जन्म और लीलास्थली मथुरा-वृंदावन को एक बार फिर हराभरा बनाने की योजना में मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण जुट गया है। इसके लिए चार हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में धार्मिक आस्था से जुड़ी पौधशाला तैयार की जा रही है, जहां कृष्णकालीन पौधे तैयार किए जाएंगे। इस पौधशाला के लिए मथुरा-वृंदावन नगर निगम ने विकास प्राधिकरण को जयसिंहपुरा क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराई है।
कभी भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली मथुरा पेड़-पौधे युक्त हरियाली से ओतप्रोत थी। भगवान श्रीकृष्ण ने इसी लीला क्षेत्र में गिरिराज पर्वत को उठाकर पर्यावरण के संरक्षण का संदेश भी दिया था, लेकिन वर्तमान स्थितियां अब पूरी तरह बदल गई हैं। दो साल पहले आई केंद्रीय रिपोर्ट के मुताबिक सेटेलाइट से जुटाए गए आंकड़े बताते हैं कि मथुरा जनपद में वन क्षेत्र कम हुआ है। इन स्थितियों को देखते हुए शहरी क्षेत्र में पौधों के प्रति स्थानीय लोगों का रुझान बढ़ाने की योजना मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने बनाई है।
इस योजना के तहत पौधशाला में कृष्णकालीन पौधे तैयार किए जाएंगे, जिन्हें लोगों को उनके पास उपलब्ध खुले क्षेत्र की आवश्यकतानुसार दिया जाएगा। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण को नगर निगम ने जयसिंहपुरा क्षेत्र में चार हजार वर्ग मीटर जमीन उपलब्ध कराई है। यहां तैयार हो रही पौधशाला में स्थानीय लोगों की धार्मिक भावना के अनुरूप कृष्णकालीन पौधे तैयार किए जाएंगे।
कृष्णकालीन पौधे
कृष्ण बरगद, कदंब, पागड़, पीपल, खिन्नी, अर्जुन, नीम, जामुन आदि।
यहां लोगों में धार्मिक भाव के अनुरूप पौधे लगाने के प्रति रुझान है। इसी रुझान को देखते हुए कृष्णकालीन पौधे तैयार करने के लिए जयसिंहपुरा क्षेत्र में पौधशाला तैयार की जा रही है। यह पौधशाला बरसात के अगले सीजन में पौधे तैयार कर देगी। यह पौधे आम लोगों के साथ सरकारी तौर पर तैयार हो रहे वन क्षेत्र में भी रोपे जा सकेंगे।
- मुकेश शर्मा, पर्यावरण सलाहकार, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, मथुरा