जवाहर बाग पर कब्जा जमाए कथित सत्याग्रहियों पर जिला प्रशासन की अंतिम चेतावनी का भी कोई असर नहीं हुआ। रविवार को शाम पांच बजे तक कोई भी सत्याग्रही जवाहर बाग छोड़ कर नहीं गया। उधर, बाहर से भी अभी तक पुलिस फोर्स नहीं पहुंची है। ऐसे में प्रशासन भी बैकफुट पर आया है और कार्रवाई के लिए बाहर से आने वाली पुलिस फोर्स का इंतजार कर रहा है।
करीब तीन हजार सत्याग्रहियों से जवाहर बाग खाली करने के प्रशासन ने पहले सत्याग्रहियों को 48 घंटे और उसके बाद 24 घंटे की मोहलत दी थी। साथ ही कार्रवाई के लिए बाहर से अतिरिक्त पुलिस बल मांगा था। इस संबंध में डीएम ने शासन को भी पत्र लिखा था।
तीन दिन बीतने के बाद भी बाहर से एक भी पुलिस कर्मी नहीं पहुंचा है। उधर, प्रशासन की कार्रवाई की चेतावनी के बाद भी सत्याग्रही पीछे हटने को तैयार नहीं है। हालांकि प्रशासन दावा कर रहा है कि कुछ बच्चे और महिलाएं बाहर गई है। लेकिन जवाहर बाग में सत्याग्रहियों की गतिविधियां पहले की तरह चल रही है।
कोर्ट की अवमानना पर मई में सुनवाई
बार के पूर्व अध्यक्ष और जवाहर बाग प्रकरण में उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ता विजयपाल सिंह तोमर ने बताया न्यायालय ने एक साल पहले जवाहर बाग को खाली कराने के आदेश प्रमुख सचिव शासन, जिला अधिकारी, एसएसपी मथुरा को दिए थे। इस मामले में उन्होेंने स्वयं आदेश की प्रति सभी कार्यालयों को रिसीव कराई। अब उच्च न्यायालय में अवमानना का प्रार्थना पत्र दिया गया है। जिस पर संभवत: मई में सुनवाई होगी। वे सभी तथ्य न्यायालय में रखेंगे।
लेखपालों ने लगाया उत्पीड़न का आरोप
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष चौधरी वीरेंद्र सिंह ने प्रशासन पर दबाव बनाने और उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि जवाहर बाग को लेकर चल रही हड़ताल को समाप्त कराने के लिए प्रशासन कर्मचारियों के पुराने मामलों को निकाल रहा है और उनमें कार्रवाई करने का डर दिखा रहा है।
बीते दो दिन से डीएम जिले से बाहर हैं। सोमवार को इस स्थिति पर चर्चा होगी। प्रशासन को पुलिस बल आने का इंतजार है। फोर्स आते ही जवाहर बाग को खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
- विजय कुमार
सिटी मजिस्ट्रेट मथुरा