मथुरा। 330 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में 17 से 30 जुलाई तक एसडीएम व डिप्टी कलेक्टर द्वारा 300 उच्च विद्यालयों की जांच तो की गई लेकिन रिपोर्ट स्पष्ट नहीं दी। जिसके चलते समाज कल्याण विभाग ने फाइलों को वापस अधिकारियों को भेज दिया है। अब यह अधिकारी फिर से शासन की मंशा के अनुरूप जांच देंगे।
फर्जी विद्यालय की बिल्डिंग, फर्जी छात्र और फर्जी ही उनके कागजात लगाकर बैंकों की सांठगांठ से करोड़ों रुपये का छात्रवृत्ति घोटाला हुआ। करीब 500 से अधिक उच्च विद्यालयों की शासन द्वारा तय आठ बिंदुओं पर जांच हुई। करीब 350 विद्यालयों को एसडीएम ने छात्रवृत्ति योग्य नहीं माना। इन्हीं विद्यालयों की शासन ने फिर से एसडीएम स्तर की जांच के निर्देश दिए।
डीएम नवनीत सिंह चहल ने 17 जुलाई को पांचों तहसीलवार एसडीएम व डिप्टी कलेक्टर की टीम को 22 जुलाई तक जांच पूरी करने के आदेश दिए थे। समय कम होने के कारण जांचकर्ताओं ने 30 जुलाई तक रिपोर्ट दी, वह भी अस्पष्ट दी। जिससे डीएम, सीडीओ और समाज कल्याण अधिकारी संतुष्ट नहीं हुए। शनिवार को समाज कल्याण विभाग ने सभी फाइलों को तहसीलवार जांच समिति के अधिकारियों को वापस कर दिया।
चर्चाओं में जांच का तरीका
कुछ अधिकारियों को छोड़कर अधिकतर अधिकारियों की जांच के तरीके को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। जिसे लेकर शासन स्तर के अधिकारी सतर्क हैं और सब कुछ जांचकर्ताओं से ही कराना चाहते हैं। उधर, दूसरी दफा हो रही एसडीएम स्तर की जांच को लेकर अधिकारी भी अपनी कलम को फंसाना नहीं चाहते हैं।
अधिकारियों ने जांच रिपोर्ट स्पष्ट नहीं दी थी, जिसके चलते सभी फाइलें अधिकारियों के पास वापस भेज दी हैं। यह रिपोर्ट उन्हें पुन: देनी होगी।
- डॉ. िनतिन गौड़, सीडीओ मथुरा।