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'बेटा जिंदा है भी कि नहीं': अपने लाल को तलाशती महिला फिर पहुंची मथुरा, बोली- अब मैं हारी, तू ही है बांके बिहार

Tue, 06 Jun 2023 01:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

 दंपती 22 जून 2022 को बांकेबिहारी के दर्शन के लिए आए थे। यहां उनका बेटा खो गया था, तब से वो अभी तक नहीं मिला है। 
 
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मथुरा: पोस्टमार्टम गृह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अब तो बांकेबिहारी से ही आस है...पुलिस थानों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। पिछले 11 महीने से हर 15वें दिन यहां आकर बेटे की खोज खबर लेते हैं, अब तक निराशा के सिवा कुछ हाथ नहीं लगा है। राजस्थान के सिरोही जिले में आबू रोड निवासी पुष्पा देवी यह कहते हुए अपने आंसू नहीं रोक पाई। रूंधे गले से कहा कि जिसे 25 साल पाल-पोसकर बड़ा किया उसे कैसे भूल सकते हैं, लेकिन उसे खोजने में पुलिस जरा भी मदद नहीं कर रही। यहां आकर खुद ही अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन आदि पर अपने बेटे को तलाशते हैं। धर्मशालाओं के रिकॉर्ड चेक करते और जो भी मिले उसे फोटो दिखाकर सुराग लगाने की कोशिश करते हैं...पर अब थक चुके हैं। यही पता नहीं चल रहा कि उनका बेटा इस दुनिया में है या नहीं।

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पुष्पा देवी अपने पति जितेंद्र के साथ सोमवार को मथुरा पहुंची। सारी उम्मीदें छोड़कर दोनों पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, क्या पता अज्ञात शवों में उनके बेटे का चेहरा भी दिखा जाए। पुष्पा ने जैसे ही अज्ञात शव वाले रजिस्टर को उठाने की कोशिश की उसके हाथ कांपने लगे। मन में भगवान से यही प्रार्थना कर रही थी कि इसमें उनके बेटे की तस्वीर न हो, लेकिन अंदर ही अंदर इस आशंका में टूटी जा रही थी कि कहीं उसकी मौत न हो गई हो। आखिर रजिस्टर में उसके बेटे का फोटो न मिला तो कुछ राहत महसूस की। वह बोलीं की कम से कम उसके आने की उम्मीद तो है। अब तो बांके बिहारी उसे मिलाएगे।

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पुलिस नहीं कर रही मदद

आंसुओं से भरी आंखों को पोंछते हुए पुष्पा देवी ने बताया कि वह 22 जून 2022 को बांकेबिहारी के दर्शन को आई थीं। साथ पति जितेंद्र, बड़ा बेटा गौरव, बेटी कोमल और 25 वर्षीय सबसे छोटा बेटा आशु कुमार भी था। आशु दिमाग से थोड़ा कमजोर है। सभी ने बांके बिहारी के दर्शन किये और लड्डू गोपाल के लिए वस्त्र खरीदने दुकान पर पहुंचे। यहीं आशु लापता हो गया। अगले दिन उन्होंने कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस से मंदिर और उसके आसपास लगे सीसीटीवी दिखाने की मांग की। पुलिस ने गुमशुदगी तो दर्ज कर ली, लेकिन सीसीटीवी फुटेज नहीं दिखाई। एसएसपी के आदेश के बाद पुलिस ने आठ दिन बाद उसी दिन की सीसीटीवी फुटेज दिखाकर उन्हें टरका दिया। तब से वह हर 15वें दिन अपने पति के साथ यहां आती हैं और बेटे की तलाश में दर-दर भटकती हैं।

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हर जगह तलाश रहे

दंपती वृंदावन के साथ ही बरसाना, गोकुल, महावन समेत अन्य थानों में भी जाकर गुहार लगा चुके हैं। वहां अपने बेटे की फोटो दिखाते हैं। थानों में अज्ञात शव के रिकाॅर्ड को देखते हैं और मायूस होकर लौट जाते हैं। जितेंद्र ने बताया कि वह प्राइवेट कंपनी में कार्य करते हैं। माह में दो बार छुट्टी लेना मुश्किल हो जाता है। कई बार नौकरी जाने तक की नौबत आ गई है, लेकिन बेटे को खोजना ज्यादा जरूरी है।

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