रंग रंगीलेन ते सनीली गलियां फाग कौ झमकतौ रूप दिखाय रहीं हैं। ढोल-नगाड़े की ताल पै रसिकन की टोली ठुमकती जाय रही। सांकरी मै आनंद की खान आय समाई हैं। फाग पै चढ़े राग नै रंगीली कौ रंग और उ चटक कर दियौ है। बरसाने की होरी मै संगीत घुलौ मिलौ है। रसियन कौ रस मन कू हुलसाय रहृयौ है।
कहूं गुलाल की मूंठें चल रही हैं तौ कहूं पिचकारी की धार। तबही तौ सखी गाय रही है या बरसाने की होरी मै रंगीली मै होय गयी... मेरौ तन मन भयौ रंगीलौ, मेरौ जीवन भयौ रंगीलौ... मैं तौ श्याम रंग मै रंग गई। तौ कोई हक ते कह रही है, तोते होरी खेलन आए हैं, सुन बरसाने वारी.... रंगीली के या रंग की छाप मन ते कबहू नाय मिटैगी।
शुक्रवार को रंगीली में सारा बरसाना रंगीला हो गया। गैल गिरारे गुलाल और रंग में नहाए थे। प्रात: काल से ही परिक्त्रस्मा मार्ग में होरी का हल्ला मच गया। रसिकों की टोली एक दूजे पर गुलाल उड़ाती नाचती गाती चल रही थी। जगह जगह नंदलाल हाथों में गुलाल लिए खडे़ थे। राधा के नजर आते ही भर भर मूंठ मारते तो कोई पिचकारी की धार से उसे सिर से पांव तक तर बतर कर देता मस्ताने हुरियारे राधा के नाम का प्याला पीकर झूम रहे थे। गा रहे थे, पीनी है तो राधा के नाम की पी, सारी जिंदगी नशे में गुजर जाएगी। सहारा बेसहारों को मिला है, राधा के दर पे...। भक्ति और रस की झमाझम बारिश मै रसिक रसाबोर थे। जगह जगह भंडारों की व्यवस्था थी।
कई लोग टोलियों में स्पीकर के साथ चल रहे थे। सखियों का उल्लास देखते बनता था। हाथों में पिचकारी लिए बाल गोपाल भी होली का रंग जमाए थे। छोरियां उन्हें देखकर ही भागने लगतीं। भक्तों ने राधा रानी के दर्शन कर उन्हें अबीर गुलाल अर्पित किया। लाड़िली मंदिर में सुबह से ही रंग की होली शुरू हो गई थी।
तमन्ना की होली
होली की टोली में मंगलामुखी तमन्ना बरबस ही ध्यान खींच रही थीं। रंगीली खेलने का उनका अपना अंदाज था। गुलाल में रंगीं तमन्ना बरसाने की हर बच्ची को गोद में लेकर दुलार रही थीं। जैसे राधा रानी से ही लाड़ लड़ा रही हो। उनकी आंखों में ममत्व भरा था। बोलीं, राधा को प्रेम किए बिना होली कहां। बरसाने की हर बच्ची में हमें राधा नजर आती हैं। बच्चों को दुआएं देते आए हैं पर यहां कुछ अलग भाव आ जाता है।
रसिया के रस में डूबा मान मंदिर
मान मंदिर में भी रंगीली का रस बरसा। आसपास के गांवों से आए गायकों ने होरी के रसिया गाकर वातावरण को फागमय कर दिया। मंदिर की गोपियां श्यामा श्याम के प्रेम रंग में निरतने लगीं। संत रमेश बाबा ने भी रसिया गाकर रंगीली मनाई। रंगीली होरी आई, धूम मची बरसाने....होरी आई री ब्रज में होरी आई री.... आदि रसिया गाए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्त मौजूद थे। मान बिहारी के दर्शन पाकर सबके हृदय आनंद से भर गए।